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नीतियों में बदलाव का निर्देश देना आरटीआई कानून के दायरे में नहीं: हाईकोर्ट
Tue, 22 Oct 2019 07:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 22 Oct 2019 07:28 AM IST
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DELHI HIGH COURT
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किसी संस्थान के नीतिगत मुद्दे पर कोई निर्णय देना अथवा नीतियों में बदलाव का निर्देश देना सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में नहीं आता है। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की उस याचिका को खारिज करते हुए की जिसमें ‘बाल श्री योजना’ के तहत मेधावी छात्रों के चयन की वर्तमान नीति में बदलाव करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई थी।
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न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने आयोग के 11 नवंबर 2018 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दिए आदेश को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्देश सीआईसी की शक्तियों और वैधानिक ढांचे से बाहर है। अदालत ने यह आदेश मंत्रालय की उस अपील पर दिया, जिसमें कहा गया था कि सीआईसी का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है और जो निर्देश दिए गए हैं वह आरटीआई अधिनियम के दायरे से बाहर हैं।
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केंद्रीय मंत्रालय की ओर से यह याचिका अधिवक्ता राहुल शर्मा और सी के भट्ट ने दाखिल की थी। गौरतलब है कि सीआईसी ने यह आदेश राष्ट्रीय बाल भवन में दाखिल आरटीआई कार्यकर्ता की अपील पर दिया था।
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इसमें बाल भवन की सदस्यता के लिए आयु सीमा का ब्योरा मांगा गया था और यह पूछा गया था कि क्या बाल श्री पुरस्कार की पात्रता के लिए यह जरूरी है। सीआईसी ने अपने आदेश में कहा था कि मेधावी छात्रों के चयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्टता, पारदर्शिता और निर्णय की भारी कमी है और नीति में पूरी तरह बदलाव की जरूरत है।