डेल्टा-1 निवासी अजीत की जरा सी लापरवाही से रविवार सुबह उसका डेढ़ वर्षीय बेटा पीकू कार में कैद हो गया। दरअसल अजीत बेटे को कार में छोड़कर डेयरी से दूध लेने चला गया। गाड़ी का एसी ऑन था, इसलिए जाने से पहले उसने शीशे चढ़ा दिए थे।
कार में मासूम को छोड़ दूध लेने गया था बाप, बच्चे ने भीतर से गेट किया लॉक
इस दौरान बच्चे ने खेल-खेल में कार का गेट भीतर से लॉक कर लिया। चंद मिनटों बाद जब अजीत दूध लेकर लौटा तो गेट नहीं खुला। उसने लोगों से मदद मांगी।
आसपास के दुकानदार और अजीत पेचकस आदि औजार से कार का डोर खोलने में लग गए। किसी अनहोनी की आशंका से पिता और अन्य लोगों के पसीने छूट रहे थे, वहीं दूसरी ओर बच्चा इस सब से बेखबर था। वह कार के चारों ओर भीड़ देखकर खिलखिला रहा था।
लगभग 28 मिनट तक प्रयास के बाद किसी तरह कार का गेट खुला और अजीत ने बेटे को गाड़ी से निकालकर सीने से लगा लिया। घटना से घबराए अजीत ने कहा कि उससे गलती से बच्चे को कार में छोड़ने की भूल हो गई। इस घटना से उसे सबक मिल गया। उसने अन्य लोगों से भी कभी ऐसा न करने की अपील की।
बच्चों के साथ ये सावधानी जरूरी
-बच्चे बेहद चंचल होते हैं। ऐसे में उन्हें कार के भीतर कभी अकेला न छोड़ें।
-बच्चे को ड्राइविंग सीट से जितना दूर रखें, उतना बेहतर है। बच्चा गीयर, स्टीयरिंग या अन्य सामान को पकड़ हिला सकता है। इससे गाड़ी अनियंत्रित हो सकती है और चालक का ध्यान बंटने से हादसा हो सकता है।
-अगर गाड़ी की खिड़की खुली है तो बच्चे को उससे थोड़ा दूर रखें। बच्चा अपना हाथ या गर्दन निकालकर हादसेे का शिकार हो सकता है।