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हादसा इतना खतरनाक की रूह कांप जाए, चर्बी ने बचाई जान

Fri, 23 Oct 2015 04:57 AM IST
Updated Fri, 23 Oct 2015 04:57 AM IST
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Incident so dangerous, grease saved  life

यह सुनने में शायद अटपटा लगे लेकिन शरीर में मौजूद अत्यधिक चर्बी ने एक मरीज की जान बचा ली। ऊंचाई से गिरने के बाद बांस उसके निजी अंगों से होते हुए पेट में गया और छाती से होते हुए कंधे तक पहुंच गया।

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बांस शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों के आसपास से गुजरते हुए कंधे तक पहुंच गया लेकिन मरीज का कोई भी अंग प्रभावित नहीं हुआ। सफदरजंग अस्पताल में घायल का इलाज कर रहे डॉक्टर को इसपर विश्वास नहीं हुआ इसलिए पेट खोलकर सभी अंगों की जांच की गई इसके बाद उसकी सर्जरी कर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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कानपुर निवासी 32 वर्षीय दशरथ गुड़गांव में कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करते हुए एक घटना के दौरान ऊंचाई से गिरा। नीचे एक मजदूर धुरमूश से फर्श को समतल कर रहा था। दशरथ उसी धुरमूश पर जा गिरा।
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डॉक्टर्स को नहीं हुआ विश्वास

Incident so dangerous, grease saved  life

धूरमुश का बांस उसके अंडकोश से होते हुए पेट, छाती, रिब्स को चीरते हुए दाहिनी कांख (अंडर आर्म) तक पहुंच गया। हादसे के बाद आसपास काम कर रहे मजदूरों ने बांस को दशरथ के शरीर से निकाला और उसे इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लाया गया।

दो अक्तूबर को उसे अस्पताल लाया गया था और 12 दिनों के बाद उसे छुट्टी दे दी गई थी। सफदरजंग अस्पताल के सर्जरी विभाग के कंसलटेंट और किडनी ट्रांसप्लांट के प्रमुख डॉ. विमल भंडारी की टीम ने घायल की जांच-पड़ताल शुरू की।

घायल ने हादसे की जानकारी दी तब डॉक्टरों को विश्वास नहीं हुआ उसके बाद चश्मदीद को बुलाया गया। सभी से बातचीत करने के बाद उसी रात मरीज का अल्ट्रासाउंड किया गया, लेकिन अल्ट्रासाउंड में नहीं दिखा कि मरीज का कोई अंग प्रभावित हुआ है।

पेट खोलने के बाद चिकित्सकों ने देखा कोई भी अंग प्रभावित नहीं है

Incident so dangerous, grease saved  life

इसके बाद डॉ. विमल की टीम ने घायल के पेट को खोलकर जांच करने का निर्णय लिया। पेट खोलने के बाद चिकित्सकों ने देखा कि घायल का कोई भी अंग प्रभावित नहीं हुआ है।


डॉ. विमल ने कहा कि मरीज का चर्बी बहुत ज्यादा था, इसी वजह से बांस पेरिटोनियम के उपर से होते हुए कांख तक पहुंचा। डॉ. विमल ने कहा कि ऐसा हजारों में भी शायद ही एक मामला आता है।

उनके कैरियर का यह पहला मामला है कि शरीर के इतने महत्वपूर्ण नाजुक अंगों के पास गुजरने के बाद भी कोई अंग प्रभावित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पहले ऐसा लगा था कि घायल की आंत, लिवर और यूरिन ब्लॉडर तो डैमेज हुआ ही होगा लेकिन बचाने वाला ऊपर बाला होता है।

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