अस्पताल की करतूत, तीन दिन में लड़के को बना दिया लड़की
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सिविल अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर बच्चा बदलने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उन्हें धमकाते हुए अस्पताल से बाहर निकाल दिया।
गांव असावटी (बल्लभगढ़) निवासी जितेंद्र की पत्नी ममता को 23 अक्तूबर की रात सिविल अस्पताल में प्रसव पीड़ा के कारण भर्ती कराया गया था। पीड़ित परिवार का कहना है कि रात करीब 11:30 बजे ममता ने लड़के को जन्म दिया।
जितेंद्र की भाभी ज्योति ने बताया कि नर्स ने उसे लड़का दिखाया और बाद में नर्स ने बच्चे को बार्मर मशीन में रख दिया। ज्योति ने बताया कि 26 तारीख को जब बच्चे को मां का दूध पिलाने के लिए लाया गया तो पता चला कि वह लड़की है।
पीड़ित परिवार के लोगों ने अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और चौकीदारों पर लड़का होने पर जबरदस्ती बधाई लेने का आरोप भी लगाया है। बच्चे के पिता जितेंद्र ने बताया कि 23 अक्तूबर की रात को जब बेटा पैदा हुआ तो दो नर्स उनके पास आईं और बेटा होने की बात कहते हुए बधाई मांगी।
बधाई लड़का होने की बाद में सौंप दी लड़की
जितेंद्र ने बताया कि नर्स उससे 200-200 रुपये लेकर गईं। चौकीदारों ने भी बधाई के नाम पर रुपये लिए। ममता की डिलीवरी के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में लड़का होना दिखाया गया है।
लेकिन डिस्चार्ज के बाद अस्पताल प्रशासन उसे लड़की दे रहा है। जितेंद्र ने बताया कि उनके पास अस्पताल का वह कागज मौजूद है, जिसमें उसकी पत्नी ममता को लड़का होना दिखाया गया है।
सिविल अस्पताल प्रशासन के मुताबिक बच्चा बदलने का संज्ञान में आया है। अस्पताल के रिकॉर्ड में तीन जगह लड़की होने की बात लिखी है। पीड़ित परिवार की ओर से अभी तक कोई लिखित में शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।