नए साल से 25 हजार लोग ‘बे-कार’, मेट्रो से आएंगे अच्छे दिन
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नए साल से औद्योगिक नगरी के करीब 25 हजार लोग ‘बे-कार’ हो जाएंगे। यानी वह अपने निजी वाहनों से दिल्ली नहीं जा सकेंगे। ऐसे में उनके लिए मेट्रो, ट्रेन और रोडवेज परिवहन ही सहारा बनेगा।
दिल्ली सरकार के फैसले का यहां व्यापक असर पड़ने वाला है। राहत की बात यह है कि मेट्रो के अच्छे दिन आ जाएंगे और हाईवे के जाम से लोगों को काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा।
दिल्ली सरकार ने एक जनवरी 2016 से अपने वाहनों से रोज दिल्ली आने पर रोक लगा दी है। इस फैसले का व्यापक असर फरीदाबाद वासियों पर भी पड़ेगा। क्योंकि यहां से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली नौकरी करने व अन्य कामकाज के सिलसिले में आते-जाते हैं।
45 हजार निजी वाहन दिल्ली की सीमा में घुसते और निकलते हैं
टोल प्लाजा, फ्लाईओवर और सूरजकुंड के रास्ते प्रतिदिन करीब 45 हजार निजी वाहन दिल्ली की सीमा में घुसते और निकलते हैं। टोल अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिदिन निजी वाहनों के दिल्ली जाने वालों की संख्या 25 हजार के करीब हैं।
इनमें किराए की टैक्सियां भी शामिल हैं। नए साल से ये लोग महीने में सिर्फ 15 दिन ही अपने निजी वाहन से दिल्ली की सरहद में प्रवेश कर सकेंगे।
एसडीएम फरीदाबाद महाबीर प्रसाद का कहना है कि हर तीन महीने में करीब 10 हजार वाहनों का पंजीकरण होता है। इनमें से 50 फीसदी कारें होती हैं। उन्होंने बताया कि एक सीरीज वाला नंबर तीन महीने में खत्म हो जाता है। यदि प्रतिदिन वाहन चलाने पर रोक लगती है तो प्रदूषण काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तो क्या मेट्रो में जाना पसंद करेंगे लोग
यात्रियों के लिए रो रही मेट्रो के अब अच्छे दिन आएंगे। क्योंकि कारों पर रोक लगने के बाद कार संचालक मेट्रो से दिल्ली जाना पसंद करेंगे। जानकारों की मानें तो अभी करीब 44 हजार यात्री ही मेट्रो का सहारा ले रहे हैं।
पीक आवर्स को छोड़ दिया जाए तो पूरे दिन मेट्रो में भीड़ न के बराबर होती है। कार दिल्ली ले जाने पर रोक लगने से लोग मेट्रो को ही प्राथमिकता देंगे। इस लिए नए साल से मेट्रो में भीड़ बढ़नी लाजिमी है।
हाईवे पर बे हिसाब दौड़ रहे वाहनों के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इनमें अधिकांश कारें होती हैं। जानकारों का मानना है कि यदि 25 हजार कारें सड़क से कम होती हैं तो जाम से काफी हद तक निजात मिल जाएगी। इसका फायदा आम आदमी को होगा, जो सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं।
ये होंगी चुनौतियां
दिल्ली सरकार ने बेशक 1 जनवरी से फैसले को लागू करने का निर्णय लिया हो, पर चुनौतियां कम नहीं हैं। ये चुनौतियां केवल दिल्ली को ही नहीं, बल्कि फरीदाबाद प्रशासन के लिए भी होगी। क्योंकि दिल्ली जाने वालों के लिए परिवहन की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
फरीदाबाद से दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में जाने के लिए मेट्रो की सीधी कनेक्टिविटी नहीं है।
-सार्वजनिक परिवहन का घोर अभाव है। खासकर एसी बसों की संख्या न के बराबर है।
-दिल्ली जाने वाली सार्वजनिक परिवहन साधनों की फ्रीक्वेंसी का ध्यान रखना होगा।
-सुबह-शाम पीक आवर्स में पर्याप्त वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।