आधुनिक इंजीनियरिंग से 10 लाख साल पुरानी चट्टानों में बनी सुरंग, भारतीय रेल में जुड़ा कीर्तिमान
- विस्फोट कर खोली गई सुरंग, भारतीय रेल में जुड़ा कीर्तिमान
- मालगाड़ी व यात्री गाड़ी के लिए अलग-अलग हो जाएगी लाइन, ट्रेन की गति भी बढ़ेगी
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दस लाख साल पुरानी चट्टानों के भीतर आधुनिक इंजीनिरिंग का अदभुत उदाहरण पेश कर सोहना में सुरंग बनाई गई है। यह सुरंग वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का हिस्सा है जिसमें डबल डेकर दो मालगाड़ियां 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जीएम ऑपरेशंस वेद प्रकाश ने बताया कि यह विश्व की पहली ऐसी सुरंग है जिसे मालगाड़ियों के लिए दोहरी इलेक्ट्रिफाइड किया गया है। आखिरी विस्फोट कर सुरंग को दोनों ओर से खोला गया है। इससे भारतीय रेल के खाते में एक और कीर्तिमान जुड़ गया है। इस कॉरिडोर के शुरू होने से मालगाड़ी व यात्री गाड़ी की लाइन अलग-अलग हो जाएगी। इससे ट्रेन की गति बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ट्रेन के ऊपरी हिस्से में बिजली उपकरण लगे होने के बावजूद डबल डेकर फ्रेट ट्रेन रेक इस सुरंग में चल सकेंगे। अभी देश में मालगाड़ियां और यात्री गाड़ियां एक ही पटरी पर दौड़ती हैं। इससे रेलवे लाइन पर नेटवर्क लोड अधिक पड़ता है।
ट्रेनों की संख्या अधिक होने के कारण कई यात्री ट्रेनें लेट होती हैं। मालगाड़ियों के लिए अब अलग से यह कॉरिडोर बनाया गया है। इसके लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन की स्थापना की गई है, जो भारतीय रेलवे का ही एक अभिन्न अंग है।
दो हिस्सों में बन रहा कॉरिडोर
उन्होंने बताया कि देश में दो हिस्सों में कॉरिडोर बन रहे हैं। दोनों को नोएडा के दादरी में लिंक किया जाएगा। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नोएडा के दादरी से गुरुग्राम और गुजरात होते हुए मुंबई तक जाएगा। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेंट कॉरिडोर पंजाब के लुधियाना से दादरी होते हुए कोलकाता तक जाएगा।
जून 2022 तक पूरे होंगे कॉरिडोर
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर एमडी अनुराग सचान ने बताया कि ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर जून-2022 तक पूरे हो जाएंगे। फिलहाल दोनों रेल कॉरिडोर के सभी हिस्सों में एक साथ काम चल रहा है। दोनों कॉरिडोर के कुछ हिस्से पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके है, जिनमें स्थानीय मालगाड़ियों को ट्रायल बेस पर चलाया जा रहा है। अब तक 1600 लोडेड मालगाड़ियों को इन पर चलाया जा चुका है।
आम यात्रियों को क्या लाभ होगा
कॉरिडोर बनने के बाद सभी मालगाड़ियां इसी लाइन से गुजरेंगी। अन्य लाइन पर मालगाड़ियों का लोड खत्म होने से 50 फीसदी पटरी खाली हो जाएंगी। इससे यात्री गाड़ियों की गति मौजूदा 90 किमी से बढ़ाकर 130-160 किमी प्रति घंटे तक करना आसान हो जाएगा। आने वाले समय में भारतीय रेल से वेटिंग लिस्ट का सिस्टम खत्म हो सकेगा और हर यात्री को कन्फर्म टिकट मिल सकेगा।