इन तीन बड़ी वजह से किशोर हुआ था हीनभावना का शिकार
गौड़ सिटी-2 में हुई सनसनीखेज वारदात के खुलासे के बाद महत्वपूर्ण सवाल यह उभरकर आया है कि किशोर ने पिटाई से कुंठित होकर मां की हत्या तो की ही मासूम बहन को भी मौत के घाट उतार दिया?
एसएसपी ने बताया कि किशोर से पूछताछ में सामने आया है कि बहन पढ़ाई में बेहतर थी। इसके चलते मां और परिजन बेटी को प्यार करते और उसे डांटते थे। इससे वह हीन भावना का शिकार होकर बहन से ईर्ष्या करने लगा था।
मां पर हमले के समय बहन के जागने पर वारदात को राज रखने व ईर्ष्या में उसकी भी बेरहमी से हत्या कर दी। दस्तावेज के मुताबिक, नाबालिग आरोपी की आयु 15 वर्ष नौ माह है। पढ़ाई में 11 वर्षीय बहन उससे बेहतर थी।
स्कूल में भी यही हाल था, कई सहपाठी पढ़ाई में किशोर से बेहतर थे। पढ़ाई में पिछड़े रहने से उसे घर और स्कूल दोनों जगह ताने मिल रहे थे। इससे वह हीनभावना का शिकार हो रहा था और स्कूल में अलग-थलग रहने लगा था।
कई बार बहन से तुलना करते हुए मां उसे बेहतर करने के लिए दबाव बनाती थी। इस दौरान वह बेटी की तारीफ करती थी। बहन भी उस पर हंसती थी और कमेंट करती थी। इससे वह कुंठित हो गया था।
मनोस्थिति नहीं समझ पाए परिजन व शिक्षक
एसएसपी के अनुसार, पढ़ाई में बेहतर करने के दबाव के बीच छात्र हाईस्कूल गैंगस्टर आदि हिंसक गेम खेलने का शौकीन हो गया था। उसे क्राइम सीरियल में दिलचस्पी हो गई थी। ऐसे में उसके दिमाग में हिंसक प्रवृति घर करने लगी थी।
इसके बावजूद परिवार के लोग और स्कूल के शिक्षक उसकी मनोस्थिति समझ पाए। मां की डांट व पिटाई के संबंध में पिता व अन्य परिजन को उसने जानकारी दी थी, लेकिन परिजन उसका साथ देने के बजाय मां का ही समर्थन करते थे।
जिस दौरान उसे काउंसलिंग की जरूरत थी, उस दौरान वह लगातार कुंठा और हीनभावना का शिकार होता रहा जिसका अंजाम सनसनीखेज वारदात के रूप में सामने आया।
गेम के खिलाफ मुहिम चलाने की अपील
नाबालिग के पिता के मामा ने मीडिया से आग्रह किया कि हाईस्कूल गैंगस्टर जैसी गेम के खिलाफ मुहिम चलानी चाहिए, ताकि कोई अन्य बच्चा ऐसी गेम को चलाकर इतना हिंसक न हो।
वहीं, आरोपी के पिता ने बताया कि उनके पास छात्र ने अंजान नंबर पर दो बार कॉल की थी। संगीन वारदात के बाद वह क्या कार्रवाई चाहते हैं? इस सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
हर मां-बाप को जागरूक होने की जरूरत
घटना से सभी को सबक लेने की जरूरत है। हर मां-बाप को अपने बच्चों की मनोस्थिति को समझकर उन्हें समझाने की आवश्यकता है। स्कूलों में भी अगर किसी बच्चे की प्रवृति कुछ अलग दिखाई दे तो उसकी काउंसलिंग की जानी चाहिए। - लवकुमार, एसएसपी, गौतमबुद्धनगर