फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   In Delhi, the public will decide the development of the region.

दिल्ली में अब जनता की राय पर तय होगें विकास कार्य

Sun, 05 Jul 2015 10:53 AM IST
बृजेश सिंह / अमर उजाला, नई दिल्ली
बृजेश सिंह / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 05 Jul 2015 10:53 AM IST
विज्ञापन
In Delhi, the public will decide the development of the region.

अब जनता तय करेगी कि उनके इलाके में क्या विकास कार्य होने चाहिए। सरकार इस काम को मोहल्ला सभा और स्वराज निधि के जरिये करेगी। इसके लिए दिल्ली भर में मोहल्ला सभाएं आयोजित होंगी।

विज्ञापन


केजरीवाल सरकार भले ही इसे नई पहल बता रही हो, मगर असल में यह शीला सरकार के दौरान चलने वाली भागीदारी योजना का बदला हुआ रूप है।

स्वराज निधि के तहत विकास कार्य सुचारु रूप से चले, इसके लिए भागीदारी योजना से केजरीवाल सरकार ने सबक लिया है। ‘भागीदारी’  के फेल होने की एक वजह यह थी कि विभागों के बीच समन्वय की कमी थी।

विज्ञापन


मौजूदा सरकार इस समस्या को खत्म करने के लिए बजट में तय सभी काम जिलास्तर पर गठित होने वाली डूडा (दिल्ली अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी) से कराएगी।

'भागीदारी' की जगह 'स्वराज निधि'

In Delhi, the public will decide the development of the region.

इससे विकास कार्यों के लिए दूसरे एजेंसियों के पास नहीं जाना होगा।  केजरीवाल सरकार यह अच्छी तरह जानती है कि उसके सभी विभागों के पास कार्यवाही का अधिकार नहीं है।

अधिकारी नहीं होने से समन्वय भी नहीं बनेगा। भागीदारी का बजट स्वरूप छोटा होता था, मगर मौजूदा सरकार ने इसे बढ़ाया है। भागीदारी से जहां सबक ली है, वहीं इसमें कुछ समानताएं भी है।

भागीदारी की तर्ज पर इस योजना का संचालन राजस्व विभाग करेगा। जिले में डीएम ही स्वराज निधि का मुखिया होंगे। वे जनता के साथ मिलकर  काम करेंगे।

बजट में योजना के लिए आवंटन
-
-253 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वराज निधि के लिए रखा गया है।
-11 विधानसभाओं को 20-20 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
-59 विधानसभाओं के लिए 50-50 लाख रुपये प्रस्तावित हैं।

जानिए क्या थी 'भागीदारी'

In Delhi, the public will decide the development of the region.

क्या थी ‘भागीदारी’?
शीला दीक्षित ने सरकार में जनता के फैसलों को शामिल करने के लिए ‘भागीदारी’ की शुरूआत की थी। शीला दीक्षित ने सरकार में जनता के फैसलों को शामिल करने के लिए ‘भागीदारी’ की शुरूआत की थी।

इसके तहत ‘माई दिल्ली आई केयर फंड’(अब स्वराज निधि) भी तय किया गया था।  एसडीएम अपने सब डिविजन में महीने में एक बार स्थानीय लोगों के साथ बैठक करते थे।

जिसमें सभी विभागों के अधिकारी शामिल होते थे। जनता की शिकायतों के आधार पर काम तय होता था। मगर, दूसरे विभाग उस पर काम नहीं करते थे। शीला दीक्षित साल में कम से कम दो बार जनता के साथ ‘भागीदारी’ के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शामिल होती थी।

क्यों हुई फेल?

‘भागीदारी’ में आरडब्ल्यूए, सिविल सोसायटी से मिली शिकायतों का निपटारा ही नहीं होता था। ज्यादातर शिकायतें भी अलग-अलग विभाग की होती थीं।

डीएम कार्यालय का उन विभागों पर अधिकार नहीं था। वह एमसीडी, जल बोर्ड, पुलिस के पास शिकायतें भेजते जरूर थे। लेकिन, विभागों की आपसी समन्वय की कमी के कारण उसपर काम नहीं होता था। इसके चलते ‘भागीदारी’ से जनता का जुड़ाव कम होता गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed