जब दलित परिवार हुआ निर्वस्त्र तो पुलिस ने की थी एक बड़ी गलती
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दलित परिवार द्वारा निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन करने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग ने मंगलवार को एसएसपी को तलब करके दनकौर पुलिस पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, दलित परिवार को जेल से रिहा करने की व्यवस्था करने को कहा है। आयोग ने जांच में पुलिस द्वारा लूट की रिपोर्ट दर्ज करने में देरी और महिलाओं को रोकने के लिए महिला पुलिस की गैर मौजूदगी पर नाराजगी जाहिर की है।
7 अक्तूबर को दनकौर में दलित परिवार की तीन महिलाओं समेत 5 लोगों ने निर्वस्त्र प्रदर्शन करके जबरदस्त हंगामा किया था। पुलिस ने तीन बच्चों समेत आठ लोगों को रिवॉल्वर लूटने, पुलिस पर जानलेवा हमला करने और अश्लीलता फैलाने के आरोप में जेल भेज दिया था।
जांच में दनकौर पुलिस की दो खामियां मिली
9 अक्तूबर को दिल्ली एससी-एसटी आयोग की जांच रिपोर्ट पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग ने जिले के अधिकारियों को तलब किया था।
आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने बताया कि मंगलवार को एसएसपी और एडीएम ने रिपोर्ट सौंप दी। आयोग की ओर से मामले की जांच में दनकौर पुलिस की दो खामियां मिली हैं।
स्थानीय पुलिस ने दलित मुखिया के साथ 5 सितंबर को हुई लूट की रिपोर्ट प्रदर्शन वाले दिन दर्ज की और निर्वस्त्र महिलाओं को रोकने के लिए महिला पुलिस नहीं बुलाई गई।
दलित परिवार को जल्द रिहा कराने के लिए कहा
इन्हीं बिंदुओं के आधार पर एसएसपी को दनकौर पुलिस पर कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए दलित परिवार को जल्द रिहा कराने के लिए कहा गया है।
इस मामले में एसएसपी किरण एस का कहना है कि मामले की जांच एसपी देहात को दी गई है। पुनिया ने यूपी एससी-एसटी आयोग की जांच रिपोर्ट को गलत ठहराया है।
उन्होंने बताया कि आयोग के उपाध्यक्ष ने पीड़ित दलित परिवार के किसी भी सदस्य के बयान लिए बिना पुलिस के बयान पर ही क्लीन चिट दे दी। 9 अक्तूबर को यूपी आयोग की ओर से भी इस मामले की जांच की गई थी।