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बड़ा सवाल: अगर जुलाई तक कोरोना मरीजों की संख्या पहुंची 5.5 लाख, तो मात्र 693 वेंटीलेटर्स कैसे बचाएंगे जानें!

Thu, 18 Jun 2020 07:45 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 18 Jun 2020 07:45 PM IST
सार

  • दिल्ली में मौजूदा स्थिति में केवल 693 वेंटीलेटर उपलब्ध, जबकि जुलाई तक तीन हजार बेड्स की पड़ सकती है जरूरत               
  • कुल मरीजों के लगभग डेढ़ फीसदी को होती है गंभीर शिकायत, पड़ती है वेंटीलेटर की जरूरत
  • आईसीयू और ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड्स की संख्या बढ़ा रही सरकार

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If the number of corona patients reached 5.5 lakhs by July, then know how to save only 693 ventilators
वेंटिलेटर - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

क्या आने वाले दिनों में दिल्ली में वेंटीलेटर बेड्स की भारी कमी होने वाली है? अगर आंकड़ों को देखें तो यही स्थिति बनती दिख रही है। दिल्ली में इस समय कोरोना के मामलों की संख्या बढ़कर 47102 पर पहुंच गई है। इनमें सक्रिय मामलों की संख्या 27741 है।

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इनमें 471 मरीजों की हालत काफी गंभीर है और इन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है। यह संख्या कुल सक्रिय मामलों का 1.69 फीसदी है।

इस लिहाज से कुल मरीजों के लगभग 1.5 फीसदी मरीज गंभीर प्रकृति के होते हैं और इन्हें सामान्य बेड्स पर नहीं रखा जा सकता।

इनके लिए स्पेशल वेंटीलेटर बेड्स की जरूरत होती है, जिनकी राजधानी में भारी कमी है।
 
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने हाल ही में कहा था कि राजधानी में जुलाई माह के अंत तक 5.5 लाख मरीज हो सकते हैं।

अगर कोरोना के मामले इस संख्या तक न भी पहुंचे और इसकी आधे भी रह जाएं, तो भी इस दौरान लगभग तीन हजार वेंटीलेटर्स की आवश्यकता पड़ेगी।
 
लेकिन सरकार के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में इस समय सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर कुल 693 वेंटीलेटर उपलब्ध हैं।

यानी मौजूद उपलब्धता और आने वाले समय में मांग में चार गुने से भी ज्यादा का अंतर है।  
 
अगर सरकार इस दौरान वेंटीलेटर बेड्स की संख्या बढ़ाना भी चाहे तो यह बेहद मुश्किल भरा काम होगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेंटीलेटर्स की भारी कमी है। इन्हें बनाने वाली कंपनियों के पास भी वैश्विक मांग को पूरा करने की क्षमता में कमी बताई जा रही है।
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इनकी उपलब्धता होने और डिलीवरी होने में भी तीन से छह माह का समय लग जाता है। यानी अगर सरकार खरीदना चाहे और कंपनियां देने को तैयार भी हो जाएं तो भी तो वेंटीलेटर बेड्स उपलब्ध होने में अक्टूबर-नवंबर तक का समय लग सकता है।

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क्या हैं विकल्प

बीएलके अस्पताल के डॉक्टर संदीप नायर के मुताबिक गंभीर आईसीयू-वेंटीलेटर्स सपोर्ट वाले मरीजों की संख्या कुल मरीजों के एक फीसदी के आसपास ही होती है।


वेंटीलेटर्स और आईसीयू बेड्स के सपोर्ट से इनकी आवश्यकता को पूरी करने की कोशिश की जा सकती है।
 
दिल्ली सरकार ने जीटीबी अस्पताल के सभी 2000 बेड्स को ऑक्सीजन सपोर्ट वाला बनाया है। इसी प्रकार अन्य सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में भी ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड्स की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है।


अगर कोरोना मामले बहुत भयानक रूप से नहीं बढ़ते हैं, तो इनसे यह आवश्यकता पूरी की जा सकती है।
 
इसी बीच केंद्र सरकार ने भारी संख्या में वेंटीलेटर्स खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जल्दी ही इनके मिल जाने की संभावना है।

केंद्र को मिलने के बाद इन्हें विभिन्न राज्यों को उनकी जरूरत के हिसाब से दिया जायेगा।

सामान्य बेड्स की संख्या लगातार बढ़ी

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सख्ती के बाद दिल्ली में कोरोना बेड्स की संख्या में तेज बढ़ोतरी होती दिख रही है। दिल्ली कोरोना एप के मुताबिक़ राजधानी में अब तक कुल कोरोना बेड्स की संख्या 9647 ही थी।

लेकिन 503 नए रेल कोचों के जुड़ जाने से इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इनसे लगभग आठ हजार नए बेड्स बन गये हैं। अगले दो से तीन दिनों के अंदर में ही बेड्स की संख्या 37 हजार तक पहुंच जाएगी।

इसके आलावा दिल्ली के छतरपुर में दस हजार बेड्स का विशेष वार्ड भी बन रहा है। इस तरह सामान्य बेड्स की उपलब्धता सुलभ हो जाएगी।   
 

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