पढ़ी लिखी बहू मिले तो दहेज को ना, चुनाव हारे तो मिलेगा तलाक
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वाह री राजनीति। जो न करा दे वह कम है। पंचायत चुनाव में देखकर तो यही लगता है कि कुर्सी पाने को कितना भी गिरा जा सकता है।
तभी तो बहू के माध्यम से राजनीति चमकाने के लिए पढ़ी-लिखी बहू मिलने पर दहेज न लेने का प्रलोभन दिया जा रहा है। गिरावट तो तब देखने को मिल रही है जब कुछ लोग बहू के चुनाव न जीतने पर तलाक की शर्त रख रहे हैं।
मेवात में पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित किए जाने से मेवात में पांच साल से चुनाव लड़ने की इच्छा पाले बैठे लोग मायूस हो गए। ऐसे में पढ़ी-लिखी बहू ही एक उम्मीद नजर आ रही है।
इसलिए ऐसी बहू मिलने पर शादी में दहेज न लेने का प्रलोभन दिया जा रहा है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पंच-सरपंच बनने की राह में शैक्षणिक योग्यता रुकावट बन गई है।
सरपंच बनने के लिए शादी
अपनी चौधर कायम रखने के लिए अपनी पढ़ी-लिखी बेटी अथवा बेटे की बहु या फिर किसी महिला रिश्तेदार को चुनाव मैदान में उतारा जा रहा है। शैक्षणिक योग्यता के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के भी प्रयास हो रहे हैं।
बिजली निगम से नो ड्यूज व बैंकों से अदेयता प्रमाण पत्र हासिल करने वालों में जैसे होड़ मच गई है। बिजली निगम ने नूंह आफिस में और बैंकों में अलग से अधिकारी नियुक्त करके यह काम किया जा रहा है।
नगली के पूर्व पंच जान मोहम्मद, खेड़ला के आस मोहम्मद और मरोडा के पूर्व पंच जुमेर ने बताया कि ऐसे कई मामले उनकी जानकारी में हैं, जिनमें पढ़ी-लिखी बहू के लिए लोग दहेज न लेने की बात कह रहे हैं।
ऐसे भी लोग हैं जो यह समझौता पहले ही कर लेना चाहते हैं कि दहेज के बगैर हुई शादी में बहू चुनाव नहीं जीती तो तलाक ले लिया जाएगा।