सर्वे का खुलासा, दिल्ली में फिर चलेगी भाजपा की लहर
दिल्ली में सरकार बनाने के लिए चल रही रस्साकशी के बीच भारतीय जनता पार्टी के लिए खुशखबरी है। एक प्रतिष्ठित सर्वे एजेंसी और समाचार चैनल समूह के सर्वे में ये दावा किया गया है कि अगर अभी दिल्ली में चुनाव होते हैं, तो भाजपा को भारी मतों से जीत हासिल होगी। लेकिन जब भाजपा चुनाव के लिए जाने को राजी हो।
दावे के मुताबिक 47 फीसदी जनता चाहती है कि दिल्ली में जोड़तोड़ के बजाय फिर से विधानसभा चुनाव हो। चुनाव होते हैं तो 50 प्रतिशत मतदान भाजपा के पक्ष में होंगे। हालांकि दूसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है। चुनाव हुए तो उसको भी करीब 41 फीसदी वोट मिलेंगे।
लेकिन कांग्रेस की हालत पिछले चुनावों से अधिक बिगड़ गई है, उसे सिर्फ 4 फीसदी लोग ही वोट देंगे। दावे के मुताबिक यह सर्वे 10 सितंबर को दिल्ली की 33 विधानसभाओं के 1019 लोगों पर किया गया।
मुख्यमंत्री के लिए जनता की जुबान पर एक ही नाम
सर्वे में एक चौंकाने बात भी सामने आई है। दिल्ली की जनता भले भाजपा को सबसे अधिक वोट करेगी लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए अब भी आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल पहली पसंद हैं।
यहां अब भी 39 फीसदी लोगों मानना है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए सबसे उपयुक्त हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व वर्तमान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन हैं। 20 फीसदी लोग हषवर्धन को सीएम बनते देखना चाहते हैं।
उधर, अब भी 20 फीसदी लोगों को मानना है कि किरण बेदी दिल्ली की मुख्यमंत्री पर के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं। जबकि राजनीति से संन्यास की घोषणा कर चुकी शीला दीक्षित को भी 4 प्रतिशत लोग मुख्यमंत्री के लिए योग्य उम्मीदवार मानते हैं।
एलजी के फैसले पर क्या लोगों की राय
सर्वे में लोगों से एलजी की ओर से लिखी गई चिट्ठी के बारे में जानने की कोशिश की गई। इस पर 42 प्रतिशत लोगों को माना कि भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने निमंत्रण मिलना चाहिए। हालांकि 39 फीसदी लोगों का यह भी मानना था कि भाजपा को निमंत्रण नहीं देना चाहिए।
47 फीसदी लोगों ने दिल्ली में जोड़तोड़ के बजाय फिर से चुनाव करवाने की मंशा जाहिर की। लेकिन 34 फीसदी लोग ऐसे भी हैं, जिनके मतानुसार फिलहाल दिल्ली को चुनाव के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।
सर्वे में मिले परिणामों से एक तो साफ है कि इस वक्त दिल्ली में भाजपा और आप के बीच ही मुख्य लड़ाई है। इससे पहले लगातार 15 सालों तक शासन कर चुकी कांग्रेस लड़ाई से बाहर है। ऐसे में शीला दीक्षित के भाजपा के पक्ष में दिए गए बयान के भी कई मतलब निकाले जा रहे हैं।
क्या-क्या पूछे गए थे सवाल
बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता मिले?
हां-42%
नहीं-39%
आप को सरकार बनाने का न्योता मिले?
हां-28%
नहीं- 56%
बीजेपी को रोकने के लिए केजरीवाल को कांग्रेस साथ आएं?
हां -21 %
नहीं -71%
दिल्ली में दोबारा चुनाव हों?
हां- 47%
नहीं- 34%
बीजेपी को 'AAP' और कांग्रेस के विधायक तोड़ने चाहिए?
हां- 12%
नहीं- 67%
क्या विधायकों को पार्टी बदलने के लिए पैसे मिलते हैं?
हां- 69%
नहीं- 16%
क्या आप AAP के 'डागर स्टिंग ऑपरेशन' पर विश्वास करते हैं?
हां- 30%
नहीं- 38%
कौन हो दिल्ली का मुख्यमंत्री?
अरविंद केजरीवाल- 39%
डॉ. हर्षवर्धन- 20%
किरण बेदी- 20%
अजय माकन- 2%
जगदीश मुखी- 4%
शीला दीक्षित- 4%
आप किसी पार्टी के लिए वोट देंगे?
आम आदमी पार्टी- 41%
बीजेपी- 50%
कांग्रेस- 4%
आम आदमी पार्टी का सिर्फ 49 दिनों बाद दिल्ली की सरकार छोड़ने का फैसला सही था?
हां- 22%
नहीं- 74%
साभार- इंडिया टुडे ग्रुप व हंसा रिसर्च