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प्रॉपर्टी अपने नाम कराकर अगर नहीं करते बुजुर्गों की देखभाल तो हो जाएंगे बेदखल

Thu, 22 Dec 2016 05:34 PM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Dec 2016 05:34 PM IST
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if care taker of property do not take care of senior citizens then they might  throw out of property
- फोटो : अमर उजाला

दिल्ली में बुजुर्गों को सरकार ने प्रॉपर्टी सुरक्षा की छतरी दे दी है। अगर वरिष्ठ नागरिक का बेटा, बेटी या कानूनी वारिस प्रॉपर्टी अपने नाम सहमति से या डरा धमकाकर कराने के बाद उसका भरण-पोषण या देखरेख ठीक से नहीं करता है, तो प्रॉपर्टी खाली करवाई जा सकेगी। इससे राजधानी के 11 लाख वरिष्ठ नागरिक अब प्रॉपर्टी मामले में बच्चों से परेशान हैं, तो सीधे बिना वकील के जिला मजिस्ट्रेट के पास दावा कर सकेंगे।

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वरिष्ठ नागरिक को जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के पास एक आवेदन करना होगा। इसका निपटारा समयबद्ध तरीके से 21 दिन में एसडीएम फाइनल रिपोर्ट जमा कराकर देगा। उसके अगले दस दिन में प्रॉपर्टी खाली कराने का आदेश डीएम जारी करेंगे।
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जिला मजिस्ट्रेट संबंधित क्षेत्र के एसडीएम की सहायता से जांच पड़ताल करवाकर मकान खाली करने का आदेश जारी कर सकेगा, जिसे मानने की बाध्यता होगी। अगर संबंधित व्यक्ति प्रॉपर्टी खाली करने का आदेश 30 दिन में नहीं मानता है, तो जिला मजिस्ट्रेट या उसकी तरफ से अधिकृत अधिकारी उस परिसर को खाली करवा सकेगा।
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पुलिस या जिला पुलिस आयुक्त मकान खाली कराने में जिला मजिस्ट्रेट की मदद करने के लिए बाध्य होगा। प्रॉपर्टी खाली करवाकर संबंधित वरिष्ठ नागरिक को सौंपेंगे और हर महीने की 7 तारीख को इसकी रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को भेजेंगे।

जिला मजिस्ट्रेट प्रॉपर्टी खाली कराने के पहले आवेदन में आरोपित व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे, जिसमें 10 दिन का समय देंगे। सब कुछ सुनने के बाद मकान खाली करने का आदेश अगर संतुष्ट होंगे, तभी जारी करेंगे। हालांकि अगर बेटा-बेटी या कानूनी वारिस को लगता है कि आदेश गलत पारित हुआ है तो मंडलायुक्त के पास अपील कर सकेगा।

ये किए गए हैं बदलाव
दिल्ली सरकार ने द दिल्ली मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजंस (अमेंडमेंट) रूल्स-2016 की अधिसूचना जारी कर दी है। वर्ष 2009 में बने नियम-22 के बाद नए नियम के तौर पर शामिल किए गए हैं। इसका अधिनियम केंद्र सरकार ने 2007 में बनाया था, लेकिन राज्यों को नियम बनाने थे। दिल्ली ने 2009 में जो नियम बनाए, उसमें प्रॉपर्टी सुरक्षा का जिक्र नहीं किया। नई अधिसूचना में माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक की प्रॉपर्टी या रिहायशी भवन को खाली करने की प्रक्रिया तय की गई है।

11 लाख वरिष्ठ नागरिकों को राहत मिलेगी
अभी जीवन सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के जिम्मे है, जिसमें करीब 28 हजार बुजुर्ग पंजीकृत भी हैं, लेकिन प्रॉपर्टी विवाद में हर जिले में गठित ट्रिब्युनल के पास कोई शक्ति नहीं थी। ऐसे में दिल्ली सरकार की तरफ से जिला मजिस्ट्रेट को सुनवाई और मकान खाली कराने का आदेश जारी करने तक की शक्ति देने वाली अधिसूचना से राजधानी के करीब 11 लाख वरिष्ठ नागरिकों को राहत मिलेगी।


कनफेडरेशन ऑफ सीनियर सिटीजंस ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष जेआर गुप्ता का कहना है कि हमने सरकार को सिफारिश भेजी थी। अभी बुजुर्गों की संपत्ति के मामले में कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिसमें कई साल लग जाते हैं। नए नियम अधिसूचित होने से काफी राहत मिलेगी।

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