फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   If any student in makes comments like Bihari Jat Black Mota Muslim Hindu then it registered in category of rag

Stop Ragging: बिहारी, जाट, काला, मुस्लिम या हिंदू बोला तो चलेगा रैगिंग का केस, एंटी-रैगिंग गाइडलाइन जारी

Wed, 05 Oct 2022 01:06 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 05 Oct 2022 01:06 AM IST
सार

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) के चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण दो साल के बाद अब जाकर सभी उच्च शिक्षण संस्थान और कॉलेज पूरी तरह से खुल रहे हैं। ऐसे में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को रैगिंग से जुड़ी जानकारी होनी अनिवार्य है।

विज्ञापन
If any student in makes comments like Bihari Jat Black Mota Muslim Hindu then it registered in category of rag
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उच्च शिक्षण संस्थान या फिर हॉस्टल कैंपस में किसी छात्र को बिहारी, जाट, काला, मोटा, मुस्लिम, हिंदू, जैसी टिप्पणियां की तो फिर यह रैगिंग की श्रेणी में मामला दर्ज होगा। किसी भी छात्र को मानसिक और शारीरिक शोषण के अलावा रंग, जाति, धर्म, जातियता, लिंग, क्षेत्रीय मूल, भाषाई पहचान, जन्म स्थान, निवास स्थान व आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भी कमेंट किया तो वह रैगिंग की श्रेणी मे आएगा। 

विज्ञापन


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों के अलावा आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल, तकनीकी, लॉ कॉलेजों को भी यूजीसी एंटी-रैगिंग गाइडलाइन लागू करने का निर्देश दिया है। खास बात यह है कि एंटी -रैगिंग टीम को अपनी रिपोर्ट में शौचलाय, कैंटीन, हॉस्टल, बस स्टैंड का औचक्क निरीक्षण की रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों और कॉलेजों को अपने दाखिला आवेदन पत्र में सीधे भाषा में एंटी-रैगिंग गाइडलाइन की लिखित जानकारी देना अनिवार्य होगा। वहीं, ऐसे स्थानों पर सीसीटीवी लगाने अनिवार्य होंगे, जहां सीधी किसी की नजर नहीं पड़ती हो। 
विज्ञापन


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) के चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण दो साल के बाद अब जाकर सभी उच्च शिक्षण संस्थान और कॉलेज पूरी तरह से खुल रहे हैं। ऐसे में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को रैगिंग से जुड़ी जानकारी होनी अनिवार्य है। इसलिए रैगिंग से निपटने के लिए छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए अलग-अलग शार्ट वीडियो बनाए गए हैं। अभी तक पोस्टर, वर्कशाप के माध्यम से जागरूक किया जाता है, लेकिन अब छोटे-छोटे वीडियो भी मदद करेंगे। तकनीक के इस युग में हर किसी के पास स्मार्ट फोन है और वीडियो आसानी से शेयर किये जा सकते हैं। इससे नए छात्रों के अलावा पुराने छात्रों को भी रैगिंग से निपटने में मदद मिलेगी। फिलहाल, विश्वविद्यालयों को यूजीसी रैग्यूलेशन 2016 के तहत संशोधित एंटी-रैगिंग की गाइडलाइन भेजी गयी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


छात्रों से नियमित संवाद से कैंपस को रैगिंग मुक्त करें
यूजीसी सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से विश्वविद्यालयों को पत्र में लिखा है कि विश्वविद्यालयों को अपने कैंपस रैगिंग मुक्त करने पर काम करना होगा। इसमें रैगिंग रोधी समिति बनाने, छात्रों के साथ नियमित संवाद एवं परामर्श, छात्रावासों का औचक निरीक्षण आदि शामिल है। छात्रों के साथ नियमित संवाद व उनकी काउंसलिंग होनी चाहिए, ताकि रैगिंग के शुरुआती संकेतों और परेशानी पैदा करने वाले तत्वों का पता लगाया सके। हॉस्टल, छात्रों के रहने के स्थान, कैंटीन, आराम सह मनोरंजन कक्ष, शौचालयों, बस स्टैंड का औचक निरीक्षण किया जाना चाहिए। इससे रैगिंग या किसी अवांछित व्यवहार या घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।     


वेबसाइट पर कमेटी के सदस्य की जानकारी करें सार्वजनिक
यूजीसी ने अपने निर्देश में लिखा है कि सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी वेबसाइट में रैगिंग मुक्त कैंपस बनाने पर काम करने के लिए सारी जानकारी अपलोड करनी होगा। इस समिति से जुड़े प्रोफेसर के फोन नंबर, ईमेल-आईडी और नाम सार्वजनिक करने होंगे। इसके अलावा लैंडलाइन नंबर भी उपलब्ध करवाने होंगे। यदि कोई फोन या सूचना मिलती है तो बिना कोई देरी किये, उस पर कार्रवाई जरूरी होगी। उसकी सीधी जानकारी और रिपोर्ट यूजीसी को भी भेजनी अनिवार्य है। महत्वपूर्ण जगहों पर सीसीटीवी कैमरा स्थापित किये जाए। इसके अलावा इस विषय पर रैगिंग रोधी कार्यशाला, सेमिनार आदि का आयोजन किया जाना चाहिए। जैन ने अपने पत्र में कहा कि यूजीसी के नियमन एवं शपथ पेश करने संबंधी द्वितीय संशोधन के अनुरूप प्रत्येक छात्र और अभिभावकों को हर शैक्षणिक वर्ष में शपथपत्र प्रस्तुत करना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि यूजीसी के नियमन का उल्लंघन करने या रैगिंग रोकने के संदर्भ में संस्था द्वारा पर्याप्त कदम उठाने में विफल रहने पर यूजीसी अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed