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दिल्ली हिंसाः नाखूनों और हाथ-पैर से कर रहे हैं अपनों की पहचान, 12 शवों की अब तक नहीं हो पाई शिनाख्त

Sat, 29 Feb 2020 04:41 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 29 Feb 2020 04:41 AM IST
Identifying dead body with nails and hands and feet after death in delhi violence
delhi violence - फोटो : रॉयटर्स न्यूज एजेंसी

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तीन दिन तक चले खूनी संग्राम की सच्चाई जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी बयां कर रही है। उपद्रवियों की क्रूरता के शिकार मरने वालों के शवों को पहचान पाना तक दूभर हो रहा है। हालांकि हिंसा के गवाह इन शवों की आधिकारिक स्थिति पोस्टमार्टम के बाद ही सामने आ सकेगी लेकिन ऊपरी तौर पर शवों की स्थिति बहुत भयावह है।



मोर्चरी के भीतर से पहली बार सामने आई हिंसा की सच्चाई के बाद डॉक्टर भी उपद्रवियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा, जिससे ठोस पहचान परिजन कर सकें। हाथ-पैर और नाखूनों के जरिये शवों की पहचान करनी पड़ रही है। उपद्रवियों ने किसी को गोली मारने के बाद जला डाला तो किसी को गोली मारने के बाद चाकुओं से गोद डाला।


आठ लोगों के सिर पर इस तरह से वार किए गए कि उनकी मौत हो गई। जबकि एक व्यक्ति के शरीर पर तलवार से 25 बार हमला किया गया है। वहीं, 80 से 90 फीसदी जले शवों को पहचानना तक मुश्किल हो रहा है। जीटीबी की मोर्चरी में 12 शव ऐसे हैं जिनकी शुक्रवार देर शाम तक पहचान नहीं हो पाई है।
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अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुनील कुमार के अनुसार अब तक 42 में से 38 मौतें उनके यहां दर्ज की गई हैं। 38 में से 28 मृत हालत में अस्पताल पहुंचे थे। जबकि अन्य 10 लोगों ने आईसीयू में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

बेटे के सीने में मारी तीन गोली, फिर जला दिया : महमूद

मुस्तफाबाद निवासी महमूद खान ने बताया कि उनका बेटा असलम भी उपद्रवियों का शिकार हो गया। सीने में तीन गोलियां मारने के बाद उसे आग के हवाले कर दिया था। उसके पैरों को देख शव की पहचान करनी पड़ी है। वहीं मुस्तफाबाद के ही मुद्दसर की गोली लगने से मौत हुई है।

उसके चाचा अरबाज खान बताते हैं कि मुद्दसर को गोली मारने के बाद उस पर तलवार से वार किया गया। स्थिति ऐसी है कि उसका शव देख भी नहीं सकते। शिव विहार निवासी राहुल सोलंकी की मौत भी गोली लगने से हुई है। जबकि करदान पुरी निवासी मोहम्मद फुरकान के सिर पर धारदार हथियार से हमला किया गया। ठीक इसी तरह चांद बाग निवासी अंकित शर्मा के शरीर पर चाकू से अनगिनत वार किए गए।

पांच को जलाया, सात को मारी गोली

जीटीबी अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि अस्पताल मृत अवस्था में आए 28 शवों में से पांच आग से जलने और सात गोली लगने से मौत होने के थे। जबकि आठ लोगों को बुरी तरह से पीट कर मारा गया है। एक केस ऐसा भी है जिसे गोली मारने के बाद चाकुओं से गोदा गया है।

जबकि तीन केस ऐसे हैं जिनकी मौत चाकू व तलवार के वार से हुई है। चार शवों की मौत के कारण का पता नहीं चल पाया है। पोस्टमार्टम होने के बाद ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। जीटीबी अस्पताल में 215 घायलों को लाया था जिसमें से 52 मरीजों का उपचार चल रहा है।

इनमें 16 घायलों की तत्काल सर्जरी हुई है। जबकि 17 लोगों की हड्डी टूटने के कारण उनका तत्काल ऑपरेशन करना पड़ा। इनके अलावा 12 न्यूरो सर्जरी, 1 बर्न, तीन ईएनटी, 1 आर्थो और दो मरीजों को आईसीयू में रखा गया है।

फोरेंसिक विभाग के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि अधिकतर शवों पर बाहरी चोटों से मौत के कारणों का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह बहुत बड़ा हादसा था जिसने भाईचारे और इंसानियत दोनों का ही गला दबा दिया। इससे उपद्रवियों की मानसिक हालत का भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी नफरत उनके जहन में थी।

4 दिन में 13 पोस्टमार्टम, परिजनों का दुख बढ़ा रहा सिस्टम

दिल्ली हिंसा में मारे गए लोगों के शव लेने के लिए चार दिन से परिजन जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में हैं लेकिन उन्हें अब तक शव नहीं सौंपे गए हैं। चार दिन में महज 13 शवों के पोस्टमार्टम ही हुए।

दिल्ली सरकार ने मेडिकल बोर्ड गठित करने का अधिकार अस्पताल निदेशक को सौंप दिया है, जिसके बाद शुक्रवार शाम तक चार शवों का पोस्टमार्टम हो सका। शुक्रवार को मोर्चरी परिसर में गुस्साए परिजनों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया।  
 

पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी का आदेश नहीं

दिल्ली सरकार की ओर से चार दिन बाद भी पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने संबंधी आदेश जारी नहीं हुआ है। शुक्रवार को स्वास्थ्य क्षेत्र के संगठन और 150 से ज्यादा डॉक्टरों ने लिखित में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिख पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की है।

इसके अलावा मृतकों के परिवार को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने की अपील भी की है। साथ ही अस्पतालों में घायलों की उपचार में मदद संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया गया। लापता लोगों को उनके परिजन तलाश रहे हैं उनकी मदद के लिए भी हेल्पडेस्क अस्पतालों में नहीं शुरू की गईं।

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