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मस्तिष्क में होने वाले ट्यूमर की पहचान आसान होगी, विशेषज्ञों ने किया अध्ययन

Mon, 02 Sep 2019 09:59 AM IST
शाहरुख खान परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 02 Sep 2019 09:59 AM IST
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Identification of tumors in the brain will be easy
सांकेतिक तस्वीर
इंसान के मस्तिष्क में होने वाले ग्लीओमा ट्यूमर (कैंसर) की पहचान डिफ्यूजन टेंसर इमेजिंग (डीटीआई) के जरिये आसानी से हो सकती है। 
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मानेसर स्थित नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर और बीएचयू आईआईटी के विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में साबित किया है कि इस तकनीक से डॉक्टर कैंसर की स्टेज और मस्तिष्क में इसके फैलाव का सही आंकलन कर सकते हैं। 

दरअसल भारत में हर साल इस बीमारी के करीब 10 लाख मामले सामने आते हैं। कई केस ऐसे होते हैं जिनमें ट्यूमर का फैलाव मस्तिष्क में हो चुका होता है, लेकिन सही जांच न होने के कारण डॉक्टरों को इसका सही अनुमान नहीं लग पाता। 
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कई बार मरीज की उपचार के दौरान मौत भी हो जाती है। इंसान के मस्तिष्क में यह ट्यूमर एक से दूसरे छोर तक भी पहुंच सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार डीटीआई एक एमआरआई आधारित तकनीक है जिसके जरिये मस्तिष्क में सफेद पदार्थ के साथ पानी के अणुओं की स्थिति का पता चल जाता है। 
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जर्नल ऑफ न्यूरो ऑकोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन के बारे में नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. विकास पारीक बताते हैं कि देश में ज्यादात्तर डॉक्टर इस तरह के मामलों में एमआरआई और सीटी स्कैन की जांच पर ही भरोसा करते हैं। जबकि डीटीआई तकनीक की मदद से वे ऐसे ट्यूमर की पहचान और उसके फैलाव का पता आसानी से लगा सकते हैं। 


इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीज में ट्यूमर का जल्द पता चलने से उसके इलाज के लिए पूरा वक्त मिल सकेगा। डॉ. पारीक के अनुसार इस कैंसर से ग्रस्त 14 मरीजों पर अध्ययन शुरू किया गया था लेकिन छह मरीजों में इस कैंसर का फैलाव न मिलने के कारण उन्हें अध्ययन से बाहर करना पड़ा। 

शेष आठ मरीजों में वैज्ञानिकों को कैंसर का फैलाव मस्तिष्क के कार्पस कैलोसम में भी देखने को मिला। मस्तिष्क के दो भागों को जोड़ने वाले हिस्से को कार्पस कैलोसम कहा जाता है। 
 
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