देश में चिकित्सीय शोध को लगा धक्का, ICMR फंडेड स्वास्थ्य क्षेत्र के शोधों पर लगा ब्रेक
एक तरफ भारत स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाह रहा है वहीं दूसरी ओर देश में रिसर्च के लिए फंड देने वाली संस्था ने सभी तरह के रिसर्च प्रोजेक्ट को होल्ड कर दिया है।
करीब छह माह से इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने किसी भी नए प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी है। यही नहीं जूनियर और सीनियर रिसर्च फोलोशिप पर दी जाने वाली ग्रांट भी कुछ माह से रोक दी गई है। आईसीएमआर के इस कदम से देश के चिकित्सीय और अनुसंधान संस्थान के शोध कार्य पर असर पड़ा है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने अक्तूबर-2015 से रिसर्च के सभी प्रोजेक्ट को आधिकारिक तौर से होल्ड पर रखा है।
अक्तूबर से किसी भी नए प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल पाई है। यहां तक की रिसर्चर अपने प्रोजेक्ट भी आईसीएमआर में जमा नहीं करा पा रहे। क्योंकि प्रोजेक्ट ऑनलाइन जमा कराया जाता है और सभी प्रोजेक्ट होल्ड पर हैं लिहाजा नए प्रोजेक्ट को मंजूर नहीं किया जा रहा। इसकी वजह से एम्स सहित देश के कई संस्थानों के शोध कार्य पर असर पड़ा है।
नई दवाओं की खोज, बीमारी के कारण सहीत क्लीनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर की ओर से फंड उपलब्ध कराया जाता है। फंड नहीं मिलने की वजह से रिसर्चर को दूसरे विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आईसीएमआर के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन सहित कई अन्य विभागों से फंड मिलता है। लेकिन आईसीएमआर रिसर्च पर सबसे ज्यादा काम करती है।
अक्तूबर से नए प्रोजेक्ट लेने बंद कर दिए गए हैं। पुराने लंबित प्रोजेक्ट को पहले पूरा किया जा रहा है। आईसीएमआर की ओर से जितने प्रोजेक्ट पहले स्वीकार कर लिए गए थे उतना फंड उपलब्ध नहीं था। लिहाजा लंबित प्रोजेक्ट का निपटारा करने के बाद रिसर्च के लिए नए प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जाएगी। उम्मीद है नए प्रोजेक्ट को भी जल्द मंजूरी मिलेगी।-डॉ.सौम्या स्वामीनाथन, महानिदेशक, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर)।