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Delhi NCR News: अस्पताल में महीनों से गुल लिफ्ट की बत्ती मरीजों की सुरक्षा पर छाया अंधेरा
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-खराब लाइट के कारण इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित, बुजुर्ग और दिव्यांग मरीज सबसे ज्यादा परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल में लिफ्टों की लाइट खराब होने से मरीजों, तीमारदारों और अस्पतालकर्मियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की कई लिफ्टें बीते कुछ महीनों से पर्याप्त रोशनी के बिना संचालित हो रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रोजाना सैकड़ों मरीजों की आवाजाही वाले इस सरकारी अस्पताल में यह समस्या गंभीर खतरे का संकेत देती है। अस्पताल में ओपीडी, वार्ड, आईसीयू और इमरजेंसी विभाग अलग-अलग मंजिलों पर स्थित हैं। ऐसे में मरीजों को लिफ्ट का सहारा लेना मजबूरी है। लिफ्ट के भीतर अंधेरा होने से मरीजों को चढ़ने-उतरने में दिक्कत हो रही है। कई बार मरीज और उनके परिजन मोबाइल फोन की रोशनी का सहारा लेकर लिफ्ट का उपयोग कर रहे हैं, जो किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं है।
इमरजेंसी सेवाओं पर भी इस स्थिति का सीधा असर देखा जा रहा है। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर मरीजों को ले जाते समय स्टाफ को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। रोशनी की कमी के कारण समय पर मरीज को संबंधित विभाग तक पहुंचाने में देरी हो रही है, जिससे इलाज प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इमरजेंसी मामलों में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है।
लिफ्ट में अंधेरा होने से मानसिक तनाव की समस्या भी सामने आ रही है। बुजुर्ग मरीजों और बच्चों में घबराहट बढ़ रही है, वहीं कई लोगों को बंद जगह में फंसने का डर सता रहा है। तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। स्वामी दयानंद अस्पताल पूर्वी दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए आते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल में लिफ्टों की लाइट खराब होने से मरीजों, तीमारदारों और अस्पतालकर्मियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की कई लिफ्टें बीते कुछ महीनों से पर्याप्त रोशनी के बिना संचालित हो रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रोजाना सैकड़ों मरीजों की आवाजाही वाले इस सरकारी अस्पताल में यह समस्या गंभीर खतरे का संकेत देती है। अस्पताल में ओपीडी, वार्ड, आईसीयू और इमरजेंसी विभाग अलग-अलग मंजिलों पर स्थित हैं। ऐसे में मरीजों को लिफ्ट का सहारा लेना मजबूरी है। लिफ्ट के भीतर अंधेरा होने से मरीजों को चढ़ने-उतरने में दिक्कत हो रही है। कई बार मरीज और उनके परिजन मोबाइल फोन की रोशनी का सहारा लेकर लिफ्ट का उपयोग कर रहे हैं, जो किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं है।
इमरजेंसी सेवाओं पर भी इस स्थिति का सीधा असर देखा जा रहा है। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर मरीजों को ले जाते समय स्टाफ को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। रोशनी की कमी के कारण समय पर मरीज को संबंधित विभाग तक पहुंचाने में देरी हो रही है, जिससे इलाज प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इमरजेंसी मामलों में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है।
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लिफ्ट में अंधेरा होने से मानसिक तनाव की समस्या भी सामने आ रही है। बुजुर्ग मरीजों और बच्चों में घबराहट बढ़ रही है, वहीं कई लोगों को बंद जगह में फंसने का डर सता रहा है। तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। स्वामी दयानंद अस्पताल पूर्वी दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए आते हैं।
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