पुराने नोट पर बैन का दर्दनाक सच: अस्पताल ने परिजनों को शव देने से किया इनकार
1000 और 500 रुपये के नोट बंद होने के फैसले के बाद बुधवार को फोर्टिस में जमकर हंगामा हुआ। परिजनों द्वारा बिल में 1000 और 500 रुपये के नोट दिए जाने के कारण अस्पताल ने सुरक्षा गार्ड का शव देने से इनकार कर दिया।
मौके पर पहुंची पुलिस ने अस्पताल प्रशासन को बड़े नोट दिलवाकर करीब सात घंटे बाद शव परिजनों को दिलवाया। इसी तरह जिला अस्पताल में मरीजों से दवा और टेस्ट आदि की फीस लेकर उन्हें बकाये रुपये की पर्ची थमाई गई।
बताया गया है कि 7 नवंबर की शाम नोएडा की कंपनी में तैनात सुरक्षा गार्ड जयप्रकाश को हार्ट अटैक पड़ने पर परिजनों ने उसे फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान मंगलवार देर रात करीब ढाई बजे जयप्रकाश की मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन ने 500 और 1000 रुपये के नोट लेने से साफ इनकार कर दिया
जब परिजनों ने शव ले जाने के लिए बिल जमा कराना चाहा तो अस्पताल प्रशासन ने 500 और 1000 रुपये के नोट लेने से साफ इनकार कर दिया। अस्पताल प्रशासन का कहना था कि 100-100 रुपये के नोट से बिल जमा करें, जबकि परिजनों के पास 1000 और 500 रुपये के ही नोट थे।
तीमारदारोें का आरोप है कि छोटे नोट नहीं देने पर अस्पताल प्रशासन ने शव देने से इनकार कर दिया। इससे नाराज परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन से बात की और गार्ड के परिजनों से 1000 और 500 रुपये के नोट जमा करवाकर उन्हें शव दिलवाया।
फोर्टिस अस्पताल का कहना है कि उन्होंने सिर्फ बिल जमा कराने की बात कही थी, मगर परिजन बंद नोट ही जमा करने पर अडे़ थे। बाद में उन्हीं के 1000-500 के नोट लेकर बिल जमा कराया गया। शव देने से इनकार जैसी कोई बात नहीं थी।
वह तो परिजनों के पास ही था। बुधवार को बड़े नोट को लेकर अन्य अस्पतालों में भी तीमारदारों को दिक्कत हुई। जिला अस्पताल में 500 और 1000 रुपये के नोट लिए तो गए, लेकिन बकाये रुपये वापस नहीं किए गए। इसकी जगह उन्हें बकाये राशि की रसीद देकर बाद में रुपये ले जाने को कहा गया।