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घने जंगलों को काट कर बनाया गया दिल्ली का यह बाजार, पढ़ें कनॉट प्लेस का रोचक इतिहास

Sun, 22 Sep 2019 03:47 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Sun, 22 Sep 2019 03:47 PM IST
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History of Connaught Place Rajiv Chowk New Delhi Palika Bazar
कनॉट प्लेस - फोटो : Social Media

दिल्ली के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग शहर के व्यस्त जीवन से समय निकाल कर शाम के वक्त या छुट्टियों के दिन अक्सर राजधानी की खूबसूरती का दीदार करने के लिए कनॉट प्लेस (सीपी) जाते हैं। मोटे-मोटे खंभों पर खड़ी, एक जैसी दिखने वाली सफेद मनमोहक इमारतें मन को भा जाती हैं। तरह-तरह की सुविधाओं से लैस कनॉट प्लेस पर हमेशा ही टहलने वालों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन आप यह जान कर हैरान हो जाएंगे कि आज इमारतों और बिल्डिंगों वाला कनॉट प्लेस कभी घना जंगल हुआ करता था। आगे पढ़िए सीपी के बारे में कुछ रोचक बातें: 

History of Connaught Place Rajiv Chowk New Delhi Palika Bazar
कनॉट प्लेस - फोटो : Social Media

बात आज से करीब 80-90 साल पहले की है। दिल्ली के कनॉट  प्लेस में सेंट्रल पार्क, पालिका बाजार,  रीगल और प्लाजा सिनेमा हॉल की जगह चारों तरफ केवल घने जंगल हुआ करते थे। जंगल के साथ ही आसपास कुछ गांव और पास में एक मंदिर थी। यही मंदिर आज प्राचीन हनुमान मंदिर के नाम से प्रचलित है।

History of Connaught Place Rajiv Chowk New Delhi Palika Bazar
कनॉट प्लेस - फोटो : Social Media

इन जंगलों में दिन के वक्त माधोगंज, जयसिंहपुरा और राजा का बाजार के लोगों की भीड़ होती थी, लेकिन शाम होते ही जंगली जानवरों के डर से सन्नाटा छा जाता था। इन जंगलों में गीदड़, जंगली सूअर, तीतर चिड़िया आदि पाए जाते थे।

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History of Connaught Place Rajiv Chowk New Delhi Palika Bazar
कनॉट प्लेस - फोटो : Social Media

अंग्रेजों ने जब दिल्ली में एक बड़ा बाजार बनाने की योजना बनाई तो उन्हें यह जगह पसंद आई। बाजार के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने पूरे जंगल को साफ कर दिया। आस-पास के गांवों में रहने वाले लोगों को करोल बाग भेज दिया गया। 

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History of Connaught Place Rajiv Chowk New Delhi Palika Bazar
कनॉट प्लेस - फोटो : Social Media

इसके बाद बाजार का नक्शा बनाने का काम अंग्रेज वास्तुकार रोबर्ट टोर रसेल को सौंपा गया। पूरे मार्केट को 12 ब्लॉकों में बांटा गया। अंग्रेजी अक्षरों के हिसाब से A से लेकर L तक इक ब्लॉकों के नाम रखे गए। 

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