व्हाट्सऐप पर सख्त हाईकोर्ट, पुरानी नीति से शेयर नहीं होगा आपका डाटा
हाईकोर्ट ने व्हाट्सऐप की नई नीति (इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन) को लागू करने की हरी झंडी प्रदान की है। यानी अब व्हाट्सऐप उपभोक्ता का डाटा फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया से शेयर किया जा सकेगा।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि व्हाट्सऐप पुरानी नीति के तहत एकत्रित 25 सितंबर 2016 तक के उपयोगकर्ता के डाटा को फेसबुक या किसी सोशल मीडिया के साथ शेयर नहीं कर सकता है।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कहा है कि नई नीति लागू होने से पहले अगर कोई उपयोगकर्ता अपना अकाउंट हटाता है तो उसका पूरा डाटा सर्वर से हटा दिया जाए।
अदालत ने कहा कि व्हाट्सऐप के पास इस बात का रास्ता खुला है कि जिसे नई नीति के तहत अपना डाटा व जानकारी फेसबुक से शेयर नहीं करनी वह अपना अकाउंट हटा सकता है।
गौरतलब है कि 25 अगस्त 2016 को व्हाट्सऐप ने अपनी निजी नीति में संशोधन किया था। जिसके अनुसार 25 सितंबर 2016 के बाद व्हाट्सऐप फेसबुक आईएनसी व फेसबुक इंडिया ऑनलाइन के साथ डाटा साझा करेगा।
व्हाट्सऐप की नई नीति को हरी झंडी
व्हाट्सऐप ने उपयोगकर्ताओं को नई नीति लागू करने से पहले उसकी शर्तें मानने के लिए एक माह दिया था जो उपयोगकर्ता नई नीति से खुश नहीं वह अपना अकाउंट हटा सकता है। यह समय सीमा भी 25 सितंबर को खत्म हो रही है।
इससे पूर्व व्हाट्सऐप ने अदालत को बताया था की अकाउंट हटाने के बाद उनके पास उपयोगकर्ता की जानकारी नहीं होती है। वह उपभोक्ता के निजी संदेश फोटो डाटा व अन्य कंटेंट फेसबुक के साथ साझा नहीं करता है।
वह तो केवल उपभोक्ता का नाम व नंबर फेसबुक के साथ साझा करते हैं। वहीं, याचिकाकर्ता याचिका कर्मण्य सिंह सरीन व श्रेया सेठी का तर्क था कि व्हाट्सऐप अदालत को गुमराह कर रहा है।
उनका कहना था कि व्हाट्सऐप ने ही अदालत में पहले कहा था कि वह अपनी सेवा बेहतर करने के लिए मैसेज को लंबे समय के लिए रखता है। याची के अनुसार हाल ही में व्हाट्सऐप ने अपनी पैतृक कंपनी फेसबुक के साथ डाटा साझा करना शुरू किया है।
जो 7 जुलाई 2012 की प्राइवेट पॉलिसी के खिलाफ है। जो उपयोगकर्ताओं के अधिकारों के साथ समझौता है। ऐसे में नई नीति को रद्द किया जाए।