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डीयू में दाखिला संकट, HC ने नहीं की सुनवाई

Wed, 25 Jun 2014 08:24 PM IST
Updated Wed, 25 Jun 2014 08:24 PM IST
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High rejects hearing on plea of a DU student

यूजीसी और डीयू प्रशासन के बीच चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम को लेकर जो खींचातानी चल रही है उससे हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

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अपनी इसी चिंता के चलते डीयू के एक छात्र ने जो 8 छात्रों के समूह का प्रतिनिधित्व कर रहा है दिल्ली हाईकोर्ट में चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के विरोध में याचिका दायर की थी।
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बुधवार को हाईकोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया। अदालत ने इस याचिका की सुनवाई को 1 जुलाई तक टाल दिया है।

‌न‌िय‌म‌ित बेंच के अभाव में सुनवाई टली

High rejects hearing on plea of a DU student

दिल्ली यूनिवर्सिटी के चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन लेने वाले एक छात्र ने वकील आरके कपूर की मदद से दिल्ली हा‌ईकोर्ट में एफवाईयूपी के व‌िरोध में एक या‌चिका दायर की थी जिस पर सुनवाई करने से बुधवार को हाईकोर्ट ने मना कर दिया।

अदालत का कहना था ये मुद्दा बहुत ही संवेदनशील है जिसे उचित सुनवाई व सावधानी की जरूरत है। इसी कारण से वैकेशन बेंच इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकती। इस मामले की सुनवाई केवल नियमित बेंच ही कर सकती है इसलिए ‌इस याचिका पर सुनवाई 1 जुलाई को नियमित बेंच के सामने की जाएगी।

याचिका दायर करने वाले छात्र ने एफवाईयूपी के तहत डीयू में दाखिला लिया है और उसके अनुसार यह प्रोग्राम शिक्षा पद्यति के यूनिवर्सल नियमों के खिलाफ है और ‌इसे वापस लिया ही जाना चाहिए।

FYUP के पक्ष में छात्रों की याचिका

High rejects hearing on plea of a DU student

एक ओर जहां एफवाईयूपी के विरोध में डीयू के आठ छात्रों के एक समूह ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी वहीं डीयू के आठ अन्य छात्रों के एक समूह ने चार साल के डिग्री प्रोग्राम को लागू करने के लिए भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। छात्रों के इस समूह की याचिका हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील मीत मल्होत्रा की ओर से दाखिल की गई है।

इन छात्रों ने पिछले साल डीयू में एफवाईयूपी प्रोग्राम के तहत ही एडमिशन लिया ‌था और अपनी याचिका में इन्होंने मांग की है कि एफवाईयूपी को समाप्त न करके इसे चलने दिया जाए। वकील मीत मल्होत्रा ने भी अपनी याचिका जस्टिस पी रानी और वीके राव की अध्यक्षता वाली वैकेशन बेंच के सामने रखते हुए कहा कि पहले तो यूजीसी इस प्रोग्राम के लिए मान गई थी पर अब उसने अपना फैसला बदल दिया है।

यूजीसी, डीयू और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की इस लड़ाई में केवल छात्रों का ही भविष्य बर्बाद होगा इसलिए इस याचिका पर 27 जून को सुनवाई कर इसका फैसला करें। मगर कोर्ट ने उनकी इस दलील को ठुकराते हुए 1 जुलाई को नियमित बेंच के सामने सुनवाई के आदेश दिए।

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'अ‌ति संवेदनशील व गंभीर है मामला'

High rejects hearing on plea of a DU student

बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में डीयू के एफवाईयूपी प्रोग्राम के संबंध में तीन याचिकाएं पेश हुईं। पहली याचिका एडवोकेट आरके कपूर की ओर से पेश की गई जिसमें तीन साल के डिग्री प्रोग्राम को वापस लागू करने की मांग थी जिसे डीयू के आठ छात्रों की ओर से एडवोकेट कपूर ने दाखिल किया था।

दूसरी याचिका सीनियर एडवोकेट मीत मल्होत्रा ने दायर की थी जिसमें एफवाईयूपी को जारी रखने की मांग डीयू के एक छात्र समूह ने की थी। वहीं तीसरी याचिका डूटा के पूर्व अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा ने दायर की थी जो यूजीसी के एफवाईयूपी खत्म करने के विरोध में थी।

इस याचिका को कल उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी पेश किया था। इन तीनों ही याचिकाओं को वैकेशन बेंच के सामने पेश किया गया। वैकेशन बेंच की अध्यक्षता कर रही जस्टिस प्रतिभा रानी और जस्टिस वीके राव ने इस पूरे मामले को अति संवेदनशील और गंभीर मानते हुए सभी याचिकाओं की सुनवाई को 1 जुलाई तक के लिए टाल दिया जिससे नियमित बेंच इसकी सुनवाई अच्छे से करे।

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