एशियाई खेल ट्रायल: हाईकोर्ट ने विनेश और बजरंग को दी गई छूट पर WFI से मांगा जवाब, पूछा- चुनने का आधार क्या है?
न्यायमूर्ति प्रसाद ने डब्ल्यूएफआई के वकील से पूछा कि फोगाट और पुनिया को चुनने का आधार क्या है, सिवाय इस तथ्य के कि वे अच्छे खिलाड़ी हैं।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एशियाई खेलों के ट्रायल के लिए विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया को दी गई छूट के खिलाफ पहलवान अंतिम पंघाल और सुजीत कलकल की याचिका पर भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वकील को आज ही हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। दोनों पहलवानों ने भारतीय ओलंपिक संघ की तदर्थ समिति के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें इस महीने की शुरुआत में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम और महिलाओं की 53 किलोग्राम श्रेणियों के ट्रायल में फोगट और पुनिया को छूट दी गई थी।
याची ने तर्क रखा कि किसी भी पहलवान को कोई छूट दिए बिना निष्पक्ष तरीके से ट्रायल आयोजित किया जाना चाहिए और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जानी चाहिए। सुनवाई की शुरुआत में न्यायमूर्ति प्रसाद ने डब्ल्यूएफआई के वकील से पूछा कि फोगाट और पुनिया को चुनने का आधार क्या है, सिवाय इस तथ्य के कि वे अच्छे खिलाड़ी हैं।
अदालत ने कहा क्या आपके पास किसी प्रकार की चयन प्रक्रिया है? ऐसा लगता है कि उनका पूरा मामला यह है कि किसी तरह का मुकदमा होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं को देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए दो पहलवानों की क्षमता या योग्यता पर कोई संदेह नहीं है। वे जो कहते हैं वह यह है कि केवल पिछला प्रदर्शन ही उन्हें भेजने का आधार नहीं हो सकता।
यह देखते हुए कि अदालत मामले को भटकने नहीं दे सकती, न्यायमूर्ति प्रसाद ने मामले को कल के लिए सूचीबद्ध किया। साथ ही कहा कि आज ही किसी तरह का जवाब दाखिल करना होगा। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा अगर यह (चयन प्रक्रिया) उचित है, तो मैं हस्तक्षेप नहीं करूंगा।