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Delhi: इंटरनेट को नियंत्रित नहीं कर सकता कोर्ट, डीपफेक के खिलाफ याचिका पर उच्च न्यायालय की टिप्पणी
Tue, 05 Dec 2023 04:41 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 05 Dec 2023 04:41 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा, यह तकनीक अब सीमाहीन दुनिया में उपलब्ध है। आप नेट को कैसे नियंत्रित करते हैं? इस पर इतनी निगरानी नहीं रख सकते। आखिरकार नेट की स्वतंत्रता खो जाएगी। इसलिए इसमें बहुत महत्वपूर्ण संतुलन कारक शामिल हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के माध्यम से उत्पन्न डीपफेक सामग्री के उपयोग पर लगाम लगाने के लिए कोई निर्देश जारी कर सकता है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ एक वकील चैतन्य रोहिल्ला द्वारा डीपफेक को रोकने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर विचार कर रही थी।
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पीठ ने कहा, यह तकनीक अब सीमाहीन दुनिया में उपलब्ध है। आप नेट को कैसे नियंत्रित करते हैं? इस पर इतनी निगरानी नहीं रख सकते। आखिरकार नेट की स्वतंत्रता खो जाएगी। इसलिए इसमें बहुत महत्वपूर्ण संतुलन कारक शामिल हैं।
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आपको एक ऐसे समाधान पर पहुंचना होगा जो सभी हितों को संतुलित करता हो। केवल सरकार ही अपने सभी संसाधनों के साथ ऐसा कर सकती है। उनके पास डेटा है, उनके पास व्यापक मशीनरी है, उन्हें इसके बारे में निर्णय लेना होगा। यह एक बहुत ही कठिन कदम है , बहुत जटिल मुद्दा है यह कोई साधारण मुद्दा नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि डीपफेक और एआई का कुछ डोमेन में लाभकारी उपयोग भी है।
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दिल्ली दंगा : बार-बार पेशी से छूट पर सरकारी वकील की कोर्ट ने की खिंचाई
अदालत ने अन्य मामलों में व्यस्त होने के आधार पर दिल्ली दंगों के मामलों में बार-बार छूट मांगने के लिए सरकारी अभियोजकों के आचरण की निंदा की। अदालत ने पुलिस उपायुक्त (अपराध) को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस भी जारी किया। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आईपीसी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम के खिलाफ अपराध शाखा द्वारा दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे।