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मिड-डे मील को लेकर दायर हलफनामे पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकारा

Sat, 08 Aug 2020 03:28 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Sat, 08 Aug 2020 03:28 PM IST
सार

  • पीठ ने कहा किसी को भी मिड-डे मील मामले में आंखों धूल नहीं झोंकने दी जा सकती

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High court reprimanded Delhi government on affidavit filed for Mid-Meal
मिड-डे मील - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने गरीब बच्चों को दिए जाने वाले खाद्य सुरक्षा भत्तों को लेकर दिल्ली सरकार की ओर दायर भ्रामक हलफनामे पर नाराजगी जताई। पीठ ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब मिड-डे मील की बात है तो कोर्ट किसी को भी अपनी आंखों में धूल नहीं झोंकने देगी।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने याचिका के जवाब में दिल्ली सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि वह मध्याह्न भोजन योजना के तहत हर महीने प्रत्येक बच्चे को 540 रुपये का भुगतान करती है, लेकिन हकीकत में ऐसा है नहीं। पीठ ने गौर किया कि इस साल मार्च में दिल्ली सरकार के खुद के हलफनामे में कहा गया कि उसने अपने साथ पंजीकृत 8.21 लाख बच्चों को करीब सात करोड़ रुपए का भुगतान किया, जोकि प्रति बच्चा 100 रुपए से भी कम है।
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इस बीच पीठ को बताया गया कि दिल्ली सरकार ने अप्रैल से जून के बीच कुल 8.25 लाख बच्चों में से करीब पांच लाख बच्चों को कुल करीब 27 करोड़ रुपये का भुगतान किया। करीब दो लाख मामलों पर प्रक्रिया चल रही है और 75,000 अन्य मामलों में बैंक विवरण बेमेल हैं।
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इसके बाद पीठ ने कहा अगर योजना के तहत केवल पांच लाख बच्चों को भुगतान किया गया है तो प्रत्येक बच्चे को 540 रुपए देने के लिए अप्रैल से जून तक हर महीने करीब 27 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार के आंकड़े कुछ और ही बता रहे हैं। पीठ ने कहा हलफनामा उलझाने वाला लगता है और यह जानबूझकर गुमराह करने वाला बनाया गया है।

वहीं दिल्ली सरकार के वकील जवाहर राजा ने विसंगतियों को समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि मार्च महीने के बाद कक्षा आठवीं के अधिकतर बच्चों ने स्कूल छोड़ दिए होंगे और अनेक मामलों में बैंकों का ब्योरा उपलब्ध आंकड़ों से नहीं मिला। उन्होंने पीठ से विसंगतियों का कारण पता लगाने के लिए और समय मांगा।


इसके बाद पीठ ने दिल्ली सरकार को विसंगतियों के बारे में समझाने के लिए समय तो दिया, लेकिन सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। यह जनहित याचिका महिला एकता मंच एनजीओ की ओर से दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि लॉकडाउन में स्कूलों के बंद रहने के दौरान पात्र बच्चों को पका हुआ मध्याह्न भोजन या खाद्य सुरक्षा भत्ता देने के संबंध दिल्ली सरकार को निर्देश दिए जाएं।
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