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जामिया हिंसा: शरजील इमाम को झटका, ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने से हाईकोर्ट ने किया इनकार

Fri, 28 Mar 2025 06:36 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 28 Mar 2025 06:36 AM IST
सार

जामिया हिंसा के मामले में ट्रायल कोर्ट ने शरजील इमाम को मास्टर माइंड बताते हुए आरोप तय किए थे। जिसके खिलाफ शरजील ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

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High court refuses to stay trial court's action against Sharjeel Imam
शरजील इमाम - फोटो : एएनआई

विस्तार

जामिया हिंसा के मामले में आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ शरजील इमाम ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है। सात मार्च को ट्रायल कोर्ट ने शरजील को मास्टर माइंड बताते हुए आरोप तय किए थे।

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न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने बृहस्पतिवार को इमाम की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और उससे जवाब मांगा। हालांकि अदालत ने ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इमाम उस साजिश का मास्टरमाइंड था जिसके कारण 15 दिसंबर, 2019 को विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर दंगे, आगजनी और हिंसा हुई थी। कोर्ट ने कहा कि इमाम के भड़काऊ भाषणों ने दंगों को भड़काया और वह न केवल भड़काने वाला था, बल्कि एक सरगना था, जिसने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया।
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इमाम के अलावा, अदालत ने भीड़ का नेतृत्व करने और हिंसा भड़काने के आरोप में आशु खान, चंदन कुमार और आसिफ इकबाल तन्हा के खिलाफ भी आरोप तय किए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इमाम ने भड़काऊ भाषण देकर और भीड़ जुटाकर इस अशांति को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई। उस पर आरोप है कि उसने दंगों से पहले के दिनों में सार्वजनिक बैठकें कीं, भड़काऊ पर्चे बांटे और मुस्लिम छात्रों और कार्यकर्ताओं को प्रभावित करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। शरजील की ओर से दावा किया गाय कि वह 15 दिसंबर को हिंसा में शामिल गैरकानूनी सभा का हिस्सा नहीं था और उसका भाषण हिंसा को भड़काने वाला नहीं था।
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नरेश बाल्यान की चिकित्सा स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश
राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृहस्पतिवार को मंडोली जेल अधिकारियों को मकोका के तहत गिरफ्तार आप नेता नरेश बाल्यान की 28 मार्च तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। वहीं, बाल्यान ने दावा किया कि उन्हें डॉक्टर की तरफ से सुझाई गई चिंता की दवा नहीं दी जा रही है। इस बीच, विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने बाल्यान की न्यायिक हिरासत 16 अप्रैल तक बढ़ा दी है। अदालत ने 15 जनवरी को बाल्यान को जमानत देने से इन्कार कर दिया था। आप नेता को 4 दिसंबर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने 8 जनवरी को उनकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि वह संगठित अपराध सिंडिकेट में मददगार थे। पुलिस ने कहा कि अगर जमानत दी गई, तो बाल्यान गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, सबूत नष्ट कर सकते हैं और चल रही जांच को बाधित कर सकते हैं।

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