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Delhi NCR News: एनडीएमसी की मूल्यांकन पद्धति में दखल से हाईकोर्ट का इन्कार
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खान मार्केट एसोसिएशन की याचिका खारिज, कहा- वैधानिक प्राधिकरण की प्रशासनिक प्रक्रिया तय करना उचित नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खान मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका खारिज कर दी। याचिका में न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) को प्रॉपर्टी टैक्स निर्धारित करने के लिए एक समान मूल्यांकन पद्धति अपनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की खंडपीठ ने कहा कि अदालत किसी वैधानिक प्राधिकरण को रेटेबल वैल्यू तय करने की पद्धति और उसे लागू करने के तरीके के संबंध में निर्देश नहीं दे सकती।
एसोसिएशन ने एनडीएमसी क्षेत्र में रेटेबल वैल्यू तय करने में कथित धोखाधड़ी, अनियमितताओं और विसंगतियों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की थी। अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि ऐसा निर्देश देने का अर्थ होगा कि अदालत स्वयं एक प्रशासनिक तंत्र का गठन करे और उसकी संरचना व दायरा तय करे, जो सामान्यतः संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आता।
याचिका में यूनिट एरिया मेथड (यूएएम) लागू होने तक समान मूल्यांकन पद्धति अपनाने और एनडीएमसी अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की मांग की गई थी। एसोसिएशन का आरोप था कि खान मार्केट और कनॉट प्लेस में समान संपत्तियों के लिए एनडीएमसी यूएएम, वास्तविक किराया, तुलनीय किराया और ऐतिहासिक मूल्यों जैसे अलग-अलग आधारों का इस्तेमाल कर रही है। इससे समान संपत्तियों की कर देनदारी में बड़ा अंतर पैदा हो रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खान मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका खारिज कर दी। याचिका में न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) को प्रॉपर्टी टैक्स निर्धारित करने के लिए एक समान मूल्यांकन पद्धति अपनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की खंडपीठ ने कहा कि अदालत किसी वैधानिक प्राधिकरण को रेटेबल वैल्यू तय करने की पद्धति और उसे लागू करने के तरीके के संबंध में निर्देश नहीं दे सकती।
एसोसिएशन ने एनडीएमसी क्षेत्र में रेटेबल वैल्यू तय करने में कथित धोखाधड़ी, अनियमितताओं और विसंगतियों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की थी। अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि ऐसा निर्देश देने का अर्थ होगा कि अदालत स्वयं एक प्रशासनिक तंत्र का गठन करे और उसकी संरचना व दायरा तय करे, जो सामान्यतः संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आता।
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याचिका में यूनिट एरिया मेथड (यूएएम) लागू होने तक समान मूल्यांकन पद्धति अपनाने और एनडीएमसी अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की मांग की गई थी। एसोसिएशन का आरोप था कि खान मार्केट और कनॉट प्लेस में समान संपत्तियों के लिए एनडीएमसी यूएएम, वास्तविक किराया, तुलनीय किराया और ऐतिहासिक मूल्यों जैसे अलग-अलग आधारों का इस्तेमाल कर रही है। इससे समान संपत्तियों की कर देनदारी में बड़ा अंतर पैदा हो रहा है।
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