राजधानी की जेल में होती है मारपीट तो अन्य जेलों में क्या होता होगाः हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में कैदियों से मारपीट की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने इन घटनाओं की पड़ताल के तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिये 19 दिसंबर की तारीख तय की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने तिहाड़ की जेल नंबर एक में हाई रिस्क वार्ड में बंद कैदियों से 21 नवंबर की रात मारपीट की घटना को विचलित करने वाली बताया है।
खंडपीठ ने कहा अगर राजधानी की जेल में यह हालात हैं तो दूसरे स्थानों पर क्या होता होगा। यह पूरी तरह अनुचित है और इस सिलसिले में कुछ करने की जरूरत है। यह गंभीर मामला और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिये।
'जेल में शाहिद यूसुफ समेत समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है'
कोर्ट ने जिला जज की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है। यह कमेटी 18 कैदियों से मारपीट की घटना की जांच करेगी। कोर्ट ने यह कमेटी सैयद सलाउद्दीन के बेटे शाहिद यूसुफ के वकील चिनमय कनौजिया की याचिका पर सुनवाई करते हुये बनाई है।
शाहिद को एनआई ने 24 अक्तूबर को गिरफ्तार किया था और वह न्यायिक हिरासत में है। याचिका दायर करने वाले एक अन्य वकील जवाहर राजा का दावा है कि जेल में शाहिद यूसुफ समेत समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
कोर्ट ने 22 नवंबर को मारपीट की घटना सामने आने के बाद वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को जेल निरीक्षण का निर्देश दिया था। कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कैदियों से बुरी तरह मारपीट होने बात मानी है।
इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुये खंडपीठ ने कहा कि इन 18 कैदियों को एम्स में इलाज के लिये भेजा जाये। चिकित्सा अधीक्षक इन कैदियों के चोटों व इलाज की रिपोर्ट जांच समिति को सौंपेगा। कोर्ट ने जेल में मारपीट की घटना की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश जेल अधिकारियों व जांच समिति को दिया है।