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हाईकोर्ट जज ने कहा मैं नहीं कर सकता है इस मामले की सुनवाई, जानिए क्यों

Wed, 29 Mar 2017 09:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 29 Mar 2017 09:34 AM IST
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high court judge parted him from amity student suicide case
- फोटो : अमर उजाला

नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी लॉ छात्र खुदकशी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व न्यायमूर्ति विनोद गोयल की खंडपीठ ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से सुनवाई किसी अन्य खंडपीठ को सौंपने का आग्रह किया है।

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इससे पूर्व 14 मार्च को खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान खुदकशी मामले को संदेह के दायरे में लिया था। खंडपीठ ने कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि छात्र का अपने परिजनों, एमिटी प्रशासन व अन्य करीबियों से कम बात होती थी।
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उनके बीच संवादहीनता थी। अदालत ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि 20 साल का युवा केवल इसलिए खुदकशी कर लेगा कि उपस्थिति कम होने के चलते उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया।
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10  अगस्त 2016 को एलएलबी फाइनल ईयर छात्र सुशांत रोहिला ने दिल्ली स्थित अपने घर में खुदकशी कर ली थी। सुसाइड नोट में उसने लिखा था  कि मैं असफल हो चुका हूं और अब मैं जीना नहीं चाहता।

सुशांत के एक दोस्त ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि  यूनिवर्सिटी द्वारा कम उपस्थिति होने पर उसे फाइनल सेमेस्टर देने पर रोक दिया गया था।


उसने आग्रह किया था कि इस तथ्य की जांच करवाई जाए कि कहीं उसने यूनिवर्सिटी द्वारा शोषित करने से तो खुदकशी नहीं की। 6 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट के सुपुर्द की थी।

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