1984 में देश ने 1947 के बाद देखा दूसरा बड़ा दंगा: हाईकोर्ट
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1947 में विभाजन के बाद हुए दंगों में लाखों सिख, मुस्लिम व हिंदू नागरिक मारे गए थे। इसके 37 साल बाद देश ने मानवीय त्रासदी का दूसरा बड़ा दंगा 1984 में तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देखा। दंगों में 2733 सिख मारे गए। दंगों को करवाने वाले दशकों तक बचे रहे। यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेसी सांसद सज्जन कुमार को सजा सुनाते हुए की।
न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने अपने फैसले में आजादी के समय हुए दंगों पर कवयित्री अमृता प्रीतम की कविता ‘ओड टू वारिस शाह’ का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने दंगों में लाखों लोगों के नरसंहार का जिक्र किया। हाईकोर्ट ने कहा कि दंगों को अंजाम देने वाले राजनीतिक संरक्षण के कारण बचते रहे और पुलिस ने उनकी मदद की। दस कमेटियों और आयोगों की जांच के बाद इसकी जिम्मेदारी 2005 में सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने दंगों के 21 साल बाद जांच शुरू की।
कोर्ट ने कहा कि यह मानवता के प्रति अपराध था और इसके दोषियों को अंजाम तक पहुंचाने में चश्मदीद गवाहों की बहादुरी व लगन की अहम भूमिका रही है। दंगों के दोषियों को अंजाम तक पहुंचाने में तीन दशक से ज्यादा समय लगा और इस दौरान न्यायिक प्रणाली की कई बार परीक्षा हुई लेकिन लोकतंत्र में अपराधियों को सजा दिलाना बेहद जरूरी है। दूसरी ओर पीड़ितों के मन में यह विश्वास पैदा करना जरूरी है कि सच्चाई जिंदा रहेगी और न्याय जरूर होता है।
अदालत के फैसले को लेकर नेताओं ने दिए यह बयान
‘अदालत ने फैसले में कहा है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण से बचाया गया और कोई भी राजनीतिक पार्टी ऐसे कामों में लिप्त होती है तो उसकी मान्यता रद्द होनी चाहिए। यह दंगे नहीं बल्कि नरसंहार था। कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर पर भी इसी प्रकार के आरोप है और विश्वास है कि उनको भी सजा मिलेगी।’
- मनोज तिवारी, अध्यक्ष, दिल्ली भाजपा
‘कांग्रेस सरकार ने दगों की जांच आगे नहीं बढ़ने दी और केजरीवाल सरकार ने एसआईटी का सहयोग नहीं किया था। मामलों को दबाने की पूरी कोशिश की गई। आप सरकार ने अपनी एसआईटी गठित कर मामले को भ्रमित करने का प्रयास किया था। आप की कांग्रेस से गठबंधन की इच्छा से दोनों की मिलीभगत सिद्ध हो गई है।’
- विजेंद्र गुप्ता, नेता प्रतिपक्ष
‘केंद्र सरकार ने अगर दंगा मामले में गठित एसआईटी खत्म नहीं किया होती तो अब तक कई लोग जेल में होते। ‘आप’ के 49 दिन के शासन में एसआईटी गठन के फैसले को तत्कालीन उपराज्यपाल ने रोके रखा। अब बाकी मामलों में भी पीड़ितों को जल्द इंसाफ मिलना चाहिए। न्याय में देरी अन्याय के समान है।’
- संजय सिंह, सांसद, आप
‘हम हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। कोर्ट का फैसला दंगा पीड़ितों के लंबे कष्टदायक इंतजार के बाद आया है, जिनके परिजनों की हत्या उस वक्त के सत्ता पर काबिज लोगों ने की थी। कोई कितना भी ताकतवर हो, दंगों में हाथ होने पर उसे नहीं बख्शा जाना चाहिए। कोर्ट को लंबित मामलों को जल्द निपटाना चाहिए।’
- अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली
‘दंगों के मुख्य दोषी कानून से बचे हुए हैं। यह तो अभी शुरुआत है, न्याय का बाकी हिस्सा तो अभी शेष है। इस नरसंहार के सभी दोषी पकड़े जाएंगे और उन्हें कठोरतम सजा दी जाएगी। उस समय के सत्ता के शिखर पर बैठे कांग्रेसी नेता इस बर्बर नरसंहार के सूत्रधार थे। इन नेताओं को सजा के बाद ही सिख समुदाय को राहत मिलेगी।’
डॉ. सुरेंद्र जैन, अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव, विहिप