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हाशिमपुरा दंगा: लोगों को नजदीक से मारी गई थी गोली

Wed, 13 Aug 2014 10:50 PM IST
Updated Wed, 13 Aug 2014 10:50 PM IST
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hearing on hashimpura riots 1987

हाशिमपुरा दंगों के बाद कई लोगों को नजदीक से गोली मारी गई थी। गोली मारने से पहले इन्हें मुरादनगर व मकनपुर इलाके में सुनसान स्थान पर ले जाया गया था। बाद में शवों को गंग नहर और हिंडन नदी में फेंक दिया गया था।

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यह आरोप बुधवार को अंतिम बहस शुरू करते हुए अभियोजन पक्ष ने लगाया। मामला 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा व जुम्मनपुरा के 43 लोगों की हत्या से जुड़ा है।

इसमें पीएसी के सोलह अधिकारी व कर्मी आरोपी हैं। पीएसी के कंपनी कमांडर सुरेंद्र पाल सिंह समेत तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष ने बहस की शुरुआत करते हुए गोलीकांड में जिंदा बचे पांच चश्मदीद गवाहों, जांच करने वाले जांच अधिकारियों के बयान पढ़कर सुनाए।

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लोगों को घरों से अगवा किया!

hearing on hashimpura riots 1987

तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय जिंदल के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष अधिवक्ता सतीश टमटा, अतिरिक्त विशेष अधिवक्ता अकबर आबिदी ने बहस की। इस दौरान अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर व जुनैद खान भी उपस्थित थे।

अधिवक्ता टमटा ने कहा कि हाशिमपुरा व जुम्मनपुरा इलाके से 22 मई 1987 को पीएसी व सेना ने कई लोगों को उनके घरों से अगवा किया था।

जिंदा बचे जुल्फीकार, बाबुद्दीन, मोहम्मद नईम, मुजीबुर्रहमान व मोहम्मद उस्मान के बयान का हवाला देते हुए कहा कि इन लोगों को अगवा कर पहले एक जगह इकट्ठा करने के बाद मेरठ से मुरादनगर व मकनपुर इलाके में ले जाया गया।

'पुलिस ने गोली मारकर नहर में फेंका'

hearing on hashimpura riots 1987

इन लोगों को गोली मारकर गंग नहर व हिंडन नदी में फेंक दिया गया, लेकिन ये लोग जिंदा बच गए। उन पुलिस अधिकारियों के बयान भी पढ़कर सुनाए जिन्होंने गवाहों के बयान के आधार पर मुरादनगर व गाजियाबाद लिंक रोड थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच की थी।

अभियोजन पक्ष ने चाय विक्रेता दिगंबर त्यागी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उसने नहर से एक पीड़ित को निकाला था। मुरादनगर थाना पुलिस को भी उसने सूचना दी थी। उसकी सूचना पर एसआई वीरेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंच कर तफ्तीश शुरू की थी।

छानबीन करने के बाद जख्मी की पहचान बाबुद्दीन के रूप में हुई थी। उसके शरीर पर गोली का निशान था। इसके बाद जांच करने वाले इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह का बयान भी कोर्ट में पढ़ा गया।

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'बंदूक की नोक पर लोगों को ट्रक में भरा'

hearing on hashimpura riots 1987

पुलिस के मुताबिक गंग नहर व हिंडन नदी से सोलह शव बरामद किए गए थे। इन शवों का पोस्टमार्टम व जिंदा बचे लोगों का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने अपनी गवाही में कहा कि इनमें से कई लोगों को क्लोज रेंज से गोली मारी गई थी।

शरीर से 303 राइफल की गोलियां मिली थीं। यह गोलियां पीएसी को सरकार की ओर से दी जाती थीं। पीएसी जब लोगों को बंदूक की नोक पर ट्रकों में भरकर ले जा रही थी तो लोगों ने विरोध किया था।

एक शख्स ने पीएसी जवान की राइफल छीनकर गोली चला दी थी। इसमें पीएसी कर्मी लीलाधर जख्मी हुआ था और एक ट्रक पर भी गोली चली थी। यह तथ्य भी अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश किया।

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