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कंडोम के इस्तेमाल पर ये क्या बोल गए हर्षवर्धन?

Tue, 24 Jun 2014 03:35 PM IST
Updated Tue, 24 Jun 2014 03:35 PM IST
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health minister harshvardhan questions on Condoms in AIDS campaign

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एचआईवी एड्स से बचने के लिए कंडोम के इस्तेमाल और सरकार के नजरिए पर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है।

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हर्षवर्धन ने कहा कि एड्स की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कैंपेन में सरकार का फोकस सिर्फ कंडोम के इस्तेमाल के प्रति लोगों को जागरूक करने से है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
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हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार को पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंधों की ईमानदारी को प्रमोट करना चाहिए जो कि हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा है।

'कंडोम का प्रचार देता है गलत संदेश'

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विदेशी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एचआईवी और एड्स कैंपेन का सीधा जोर कंडोम के इस्तेमाल के प्रति लोगों को जागरूक करना है, जो कि समाज में गलत संदेश देता है।

उन्होंने कह‌ा कि इस अभियान का सीधा मतलब ये है कि हम लोगों को किसी के भी साथ शारीरिक संबंध बनाने की छूट देते हैं। क्योंकि कैंपेन में यही बात बताई जाती है कि जब तक आप कंडोम का इस्तेमाल कर रहे हैं आप बिल्कुल सुरक्षित हैं।

बता दें कि देश में एड्स का पहला मामला साल 1986 में सामने आया था और कुछ सालों तक यह भय पैदा हो गया था कि कहीं अफ्रीका की तरह भारत में भी यह बीमारी बड़ा रूप न ले ले।

देश में हैं 21 लाख एड्स पीड़ित

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एड्स से बचाव और जागरूकता के लिए भारत सरकार ने 1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन बनाया। इस संगठन ने लगातार देशभर में सेक्स वर्करों, ड्रग्स लेने वाले लोगों और गे पुरुषों के बीच कंडोम और साफ सुइयों के इस्तेमाल का जोरशोर से प्रचार किया।

एड्स पीड़ितों के मामले में अगर वर्तमान स्थिति अगर देखी जाए तो भारत विश्व में तीसरे स्‍थान पर है। देश में अभी 2.1 मिलियन लोग एड्स पीडित हैं।

नाको की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 85 फीसदी एड्स के मामले असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से आते हैं। संस्‍था के प्रमुख वीके सुब्बाराज ने बताया कि हाई रिस्क समूहों में कंडोम के इस्तेमाल का प्रचार रोकना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हर्षवर्धन सोचते हैं कि हम गलत चीजों को बढ़ावा दे रहे हैं।

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योजनाओं में होगा बदलाव!

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सुब्बाराज ने कहा कि देश के भीतर नैतिकता के कपड़े बहुत पारदर्शी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसी आम जनता के बीच जागरूकता लाने के लिए अपनी रणनीति और योजनाओं में बदलाव करेगी।

नाज फाउंडेशन चलाने वाली अंजली गोपालन भी देश में लोगों को एचआईवी के प्रति जागरूक कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग शादी के बाद भी दूसरे के साथ संबंध बनाते हैं। ऐसे में इन्फेक्‍शन आने का खतरा हमेशा बना रहता है।

उन्होंने कहा कि हमे पहले यह तय करना होगा कि वाकई हमारी संस्कृति और सीख क्या है।

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