फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   HC to hear pleas seeking stay on anointment of Shahi Imam's son.

'शाही इमाम के पुत्र की नियुक्ति की कानूनी मान्यता नहीं'

Fri, 21 Nov 2014 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Nov 2014 01:49 AM IST
विज्ञापन
HC to hear pleas seeking stay on anointment of Shahi Imam's son.

केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड ने कहा कि जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी द्वारा अपने पुत्र को नायब इमाम और उत्तराधिकारी बनाने के लिए आयोजित समारोह की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। हाईकोर्ट को यह जानकारी देते हुए वक्फ बोर्ड ने इस प्रकार का रवैया अपनाने पर बुखारी के खिलाफ कार्रवाई करने का भी तर्क रखा। इस मुद्दे पर अदालत अपना फैसला शुक्रवार को सुनाएगी।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति आरएस एंडला की खंडपीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड ने शाही इमाम के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाया। दोनों ने स्पष्ट कर दिया कि जामा मस्जिद, शाही इमाम की निजी संपत्ति नहीं है और वह वक्फ बोर्ड के कर्मचारी के तौर पर मस्जिद में धार्मिक रीतियों को पूरा करते हैं।
विज्ञापन


जामा मस्जिद का पूरा स्वामित्व व प्रशासनिक जिम्मा वक्फ बोर्ड का है। उन्होंने इमाम द्वारा पुत्र को नायब इमाम बनाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा। इसी के साथ 22 नवंबर को उत्तराधिकारी घोषित करने संबंधी कार्यक्रम पर भी सवाल उठने गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बाबत हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं पहले से ही दायर की गई थीं। बृहस्पतिवार को अंतिम मुगल बादशाह के बहादुर शाह जफर की सातवीं पीढ़ी के प्रिंस याकूब हबीबउद्दीन तुकी ने भी इस मुद्दे को लेकर याचिका दायर कर दी। उन्होंने कहा कि इमाम वंशानुगत नहीं हैं और न ही यह पद वंशानुगत है। उन्होंने कहा कि इमाम दिल्ली वक्फ बोर्ड का कर्मचारी हैं और उन्हें वेतन मिलता है।

सुनवाई के दौरान वक्फ  बोर्ड के अधिवक्ता ने कहा कि बोर्ड की जल्द ही बैठक होगी और बुखारी ने जो किया है उसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, केंद्र सरकार की और से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस समारोह का आयोजन जामा मस्जिद के अलावा किसी स्थान पर बिना किसी कानूनी मान्यता के किया जा सकता है। लेकिन यदि मस्जिद में किया जाता है तो गैरकानूनी होगा।

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह सवाल किया कि क्या जामा मस्जिद बोर्ड की निगरानी में है और अगर यदि है तो वह इस मुद्दे पर क्या कर रहा है। खंडपीठ ने कहा कि अगर बोर्ड सक्षम प्राधिकार है तो उन्हें जांच करने दीजिए और वह जरूरी कदम उठाए।

वक्फ बोर्ड ने माना कि जामा मस्जिद उसकी निगरानी में है और मौजूदा इमाम खुद ही अपना उत्तराधिकारी नहीं बना सकते क्योंकि उसकी मंजूरी के बिना नियुक्ति की कोई कानूनी वैद्यता नहीं होगी। बोर्ड अधिवक्ता ने कहा कि मौजूदा इमाम की नियुक्ति 2000 में की गई थी लेकिन इमाम के रूप में उन्हें मंजूरी 2006 में मिली।


वहीं, याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि इमाम बिना किसी कानूनी मान्यता के काम कर रहे हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जामा मस्जिद के आसपास उनकी कई दुकानें भी हैं जो उच्च न्यायालय के 2005 के एक आदेश का उल्लंघन है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed