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हाईकोर्ट ने महिला प्रोफेसर की याचिका पर डीयू से पूछा, संविदा कर्मियों को मातृत्व लाभ क्यों नहीं
Wed, 10 Apr 2019 10:19 PM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 10 Apr 2019 10:19 PM IST
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किसी भी संस्थान अथवा सरकार की संविदा महिला कर्मियों को मातृत्व का लाभ मिल रहा है तो डीयू की संविदा कर्मियों को यह लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा। हाईकोर्ट ने यह सवाल डीयू से एक एड हॉक महिला प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है। न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने डीयू सहित केंद्र सरकार व अरबिंदो कॉलेज से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। अब 5 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई होगी।
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याचिका में कहा गया है कि मातृत्व लाभ अधिनियम के मुताबिक याची को छह माह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए था, लेकिन डीयू ने उसे यह लाभ इसलिए नहीं दिया क्योंकि वह स्थायी प्रोफेसर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह लाभ सभी एड-हॉक अथवा स्थायी प्रोफेसर का समान रूप से दिया जाएगा।
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याची का कहना है कि उसने मातृत्व अवकाश प्राप्त करने के लिए 4 जनवरी से डीयू को कई पत्र भेजे। उसके बच्चे के जन्म की संभावित तिथि 22 फरवरी थी। उसे डीयू ने कोई जवाब नहीं दिया। तीन फरवरी को उसने बच्चे को जन्म दिया। तब से वह बिना वेतन की छुट्टी पर हैं।
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सुनवाई के दौरान डीयू के अधिवक्ता ने कहा कि याची एक एड-हॉक प्रोफेसर हैं। उसका संविदा हर चार माह में रिन्यू किया जाता है। याची का संविदा 18 मार्च को समाप्त हो चुका है। अपनी स्थायी कर्मचारियों को ही मातृत्व अवकाश देना डीयू का नीतिगत मामला है।