मेट्रो एक्ट केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को प्रस्तावित मेट्रो किराया बढ़ोतरी रोकने का अधिकार नहीं देता है। दिल्ली सरकार अगर किराया बढ़ोतरी को रोकना चाहती है, तो वह नई किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) के गठन का प्रस्ताव रख सकती है, मगर इससे पहले उसे डीएमआरसी को 3000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष देने के लिए राजी होना पड़ेगा। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 10 अक्तूबर को मेट्रो किराया बढ़ोतरी रोकने की मांग संबंधी लिखे गए पत्र के जवाब में यह तर्क रखा है।
धर्मसंकट में केजरीवाल, बढ़ने दें मेट्रो का किराया या देंगे 3000 करोड़ रुपये
हरदीप पुरी ने केजरीवाल के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि डीएमआरसी की धारा-37 के मुताबिक मेट्रो एफएफसी की सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य है। उसके फैसले को बदलने का न तो केंद्र सरकार, न ही राज्य और न ही डीएमआरसी बोर्ड के सदस्यों के पास कानूनी अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि मेट्रो का 10 अक्तूबर से प्रस्तावित किराया अपने तय समय पर बढ़ेगा। हरदीप पुरी ने अपने जवाब में केजरीवाल के उस दावे का खंडन किया है, जिसमें केजरीवाल ने किराया एक साल के अंतराल व अधिकतम 7 फीसदी बढ़ाने की बात कही थी।
केजरीवाल को लिखे गए पत्र में हरदीप पुरी ने कहा कि आप तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एफएफसी ने खुद कहा कि चूंकि किराया 7 साल के बाद बढ़ रहा ह,ै तो डीएमआरसी दो चरणों में किराया बढ़ाए। पहला मई में दूसरा अक्तूबर में। एक साल में अधिकतम 7 फीसदी बढ़ोतरी की बात कर रहे हैं, वह 2019 से लागू करने की बात कही है। उन्होंने केजरीवाल को दिए जवाब में कहा कि 2002 से 2009 के बीच तत्कालीन एफएफसी ने 112 फीसदी किराये में बढ़ोत्तरी की। इस बार जबकि सात साल बाद किराया बढ़ा है, फिर भी एफएफसी ने 91 फीसदी ही किराया बढ़ोतरी की है।
किराया बढ़ोतरी रोकिए पर देने होंगे 3000 करोड़ प्रतिवर्ष
हरदीप सिंह पुरी ने केजरीवाल को भेजे पत्र में किराया बढ़ोतरी को रोकने को लेकर सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर मेट्रो परिचालन में घाटा होता है तो उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है, इसलिए अगर आप किराया रोकना चाहते हैं, तो आपको 2017-18 से 2021-22 तक डीएमआरसी को होने वाले घाटे की भरपाई करनी होगी। यह पांच साल तक 2017-18 से क्रमश 3,040 करोड़, 3,616 करोड़, 3,318 करोड़, 3,150 करोड़, 2021-22 में 2,980 करोड़ देने होंगे। अगर सरकार इस पर सहमत है, तो केंद्र दोबारा से एफएफसी बनाने को तैयार है। उन्होंने दिल्ली सरकार को डीटीसी को दिए जाने वाले 1600 करोड़ की वित्तीय मदद व क्लस्टर स्कीम के आर्थिक मॉडल का जिक्र करते हुए डीटीसी की खस्ताहाल सेवाओं की ओर से ध्यान दिलाया।
मेट्रो फेज-तीन और चार को लेकर जताई चिंता
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री ने केजरीवाल को भेजे जवाब में निर्माणाधीन मेट्रो-फेज तीन (जो कि करीब डेढ़ साल देरी से चल रहा है) के पूरा नहीं होने और फेज-चार (जिसे करीब दो साल पहले मंजूरी मिलनी चाहिए थी लेकिन दिल्ली सरकार ने देरी की है) पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इस पर भी ध्यान दे, क्योंकि इन दोनों चरणों का 40 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा दिल्ली के लोग समयबद्ध, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चाहते हैं, इसलिए मेट्रो को स्वायत्त कंपनी की तरह काम करना चाहिए।