हैपनिंग हरियाणा : सरकार के हाथ खाली फिर भी उम्मीदें बरकरार
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जाट आंदोलन के बाद बुरे दौर से गुजर रहे हरियाणा के जख्मों पर मरहम लगाने का काम गुड़गांव में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट ने किया है। इसमें उम्मीद से कहीं ज्यादा निवेशकों का रुझान राज्य के औद्योगिक विकास में वरदान साबित होगा।
हालांकि दो दिन तक समिट का तानाबाना गुड़गांव के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा, लेकिन राज्य की सबसे पहली औद्योगिक नगरी फरीदाबाद को भी इससे उम्मीदें कम नहीं हैं।
समिट के पहले दौर में ही केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सबसे बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा कर राज्य की ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री पर मंडरा रहे संकट के बादल छंटने की आस जगाई।
जानकारों की मानें तो पिछले दो साल से ऑटो इंडस्ट्री में 30 फीसदी का स्लो डाउन है। फरीदाबाद को देश का सबसे बड़ा ऑटो मैन्युफेक्चरिंग हब कहा जाता है, जो देश ही नहीं विदेशी कार निर्माता कंपनियों को भी कलपुर्जों की सप्लाई करता है।
निवेशकों का रुझान देगा विकास को रफ्तार
लंबे समय से यहां एमएसएमई सेक्टर मदर यूनिट की मांग कर रहा है। रेल कोच फैक्ट्री भले ही औद्योगिक नगरी का हिस्सा न बने, लेकिन राज्य में इसके कहीं भी लगने से फरीदाबाद-गुड़गांव सहित एनसीआर की छोटी-बड़ी करीब 50 हजार ऑटो कंपोनेंट्स तैयार करने वाली यूनिटों को सीधा फायदा होगा।
इसके साथ ही मिंडा कोसी, मिंडा इंडस्ट्री, मिंडा रिका और टीसी मिंडा जैसी ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े उपक्रमों ने 480 करोड़ रुपये के प्रस्ताव रखे हैं, जिनका भविष्य में साकारात्मक असर पडना तय माना जा रहा है।
रियल एस्टेट इंडस्ट्री ने भी हरियाणा में 1.35 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। फरीदाबाद, बल्लभगढ़, गुड़गांव और सोनीपत पर इस इंडस्ट्री का फोकस रहेगा।
दो हजार लोगों को रोजगार देने के लिए फरीदाबाद की रक्षा उपकरण तैयार करने वाली स्टार वायर (इंडिया) ने शहर में ही 273 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है।
कंपनी ने फरीदाबाद में ही अपना नया प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा ट्रैक मेंटेनेंस के उपकरण बनाने वाली फरीदाबाद की ही प्लाजर इंडिया लिमिटेड ने 150 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है।