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उल्लावास हादसाः मौत के बाद रहम के चंदे से अपने घर पहुंचे शव, परिजनों के पास नहीं थे एंबुलेंस के पैसे

Sat, 26 Jan 2019 06:02 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 26 Jan 2019 06:02 AM IST
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gurugram building collapse dead body reached house with the help of donation
उल्लावास हादसा - फोटो : अमर उजाला

शायद उन्हें भी इस बात का अहसास नहीं था कि एक दिन मौत के बाद रहम के चंदे से उन्हें घर जाना नसीब होगा। गांव उल्लावास के निर्माणाधीन बिल्डिंग के जमींदोज होने के बाद जान गंवाने वाले कुलदीप (32), अनुराग (23) और विशाल (17) के परिजनों ने शुक्रवार को बेटों के शव ले जाने के लिए जब जेबें टटोली तो महज चंद रुपये ही निकले। करीब 800 किमी दूर उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर स्थित पैतृक गांव आलापुर जाने के लिए जब एंबुलेंस ने 75 हजार रुपये मांगे तो तीन परिजनों को अपने बेटे की मौत से ज्यादा उनके शव ले जाने की फिक्र सताने लगी। जेब में चंद पैसों के कारण वह अपने बेटों के शवों को एंबुलेंस से घर ले जाने के लिए लोगों से चंदे की गुजारिश करते दिखे।

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परिजनों के मुताबिक कुछ साल पहले ही मृतक बेटे कुलदीप, अनुराग व विशाल काम की तलाश में गुरुग्राम आए थे। तीनों मृतक यूपी के अंबेडकर नगर के रहने वाले थे। इन पर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। पैसों की बचत के लिए तीनों उल्लावास के एक मकान में एक-साथ किराए पर रहते थे। बृहस्पतिवार सुबह मकान अचानक धराशायी हो गया। जिसमें तीनों मलबे के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई। शुक्रवार को तीनों के पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के पास इनके शव को एंबुलेंस से गांव ले जाने के लिए पैसे भी नहीं थे। उन्होंने एंबुलेंस चालकों से मिन्नत की, जिसमें उनका भी दिल पसीज गया। उनकी और अन्य लोगों की सहायता से चंदा इकट्ठा करके परिजन तीनों के शवों को लेकर गांव रवाना हो गए।
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मृतक कुलदीप के मौसेरे भाई रमेश ने बताया कि शवों को ले जाने के लिए दो एंबुलेंस का खर्च 75 हजार रुपये आ रहा था। हमारे पास इतने पैसे नहीं थे। अपनी मजबूरी बताई तो आस-पास के लोगों ने मिलकर सहायता की। किसी ने एक हजार तो किसी ने दो हजार का चंदा दिया। पैसे जुटाने में ही करीब एक घंटे का समय लग गया। जिसके कारण शवों को ले जाने में देरी हो गई। यही स्थिति मृतक विशाल और अनुराग के परिजनों की भी थी। उनकी हालत देख आस-पास मौजूद लोगों की आंखों में भी पानी भर आया। रेडक्रास सोसाइटी ने 50 हजार का योगदान दिया। 

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