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World Sight Day: 5 से 15 साल के बच्चों में चश्मा लगने के मामले बढ़ रहे, बचाव है आसान; जानें विशेषज्ञों की सलाह

Wed, 08 Oct 2025 05:56 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम Published by: आकाश दुबे Updated Wed, 08 Oct 2025 05:56 PM IST
सार

5 से 15 साल के बच्चों में चश्मा लगने के मामलों में काफी वृद्धि देखी जा रही है। हर साल अक्तूबर के दूसरे बृहस्पतिवार को मनाए जाने वाले विश्व दृष्टि दिवस का उद्देश्य लोगों को आंखों की बीमारियों और उनके बचाव के प्रति जागरूक करना है।

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World Sight Day Cases of wearing glasses are increasing among children aged 5 to 15 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ani

विस्तार

कोरोना महामारी के बाद से बदलती जीवनशैली का आंखों की सेहत पर गंभीर असर पड़ा है। घंटों कमरे में बंद रहने और अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों और युवाओं में चश्मा लगने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आंखें शरीर का सबसे संवेदनशील अंग हैं और इन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

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प्राकृतिक रोशनी की कमी और पोषण की अनदेखी के कारण बहुत कम उम्र में ही नजर कमजोर होने लगी हैं। 5 से 15 साल के बच्चों में चश्मा लगने के मामलों में काफी वृद्धि देखी जा रही है। हर साल अक्तूबर के दूसरे बृहस्पतिवार को मनाए जाने वाले विश्व दृष्टि दिवस का उद्देश्य लोगों को आंखों की बीमारियों और उनके बचाव के प्रति जागरूक करना है।

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ड्राई आईज का खतरा भी बढ़ा
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि मोबाइल और लैपटॉप का सीमित उपयोग करें, आंखों को पर्याप्त आराम दें और विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। विशेषज्ञों का कहना है कि 50 वर्ष की आयु के बाद मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और एज रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, इसलिए समय-समय पर आंखों की जांच कराना और संतुलित आहार लेना महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने से ''ड्राई आईज'' का खतरा भी बढ़ रहा है। एम्स की 2018 की एक स्टडी के अनुसार, 21 से 40 वर्ष की उम्र के हर तीसरे व्यक्ति को यह परेशानी होती है। इसके लक्षण हैं आंखों में जलन, लालपन, सूखापन और धुंधला दिखना।

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एक ही कमरे में घंटों समय बिताना आंखों की समस्याओं का कारण बन रहा है। खासकर बच्चों में कम दिखाई देने की समस्या बढ़ रही है। इसके अलावा, आंखों की रोशनी बनाए रखने के लिए नियमित आंखों की जांच कराना जरूरी है ताकि समस्याओं का समय रहते पता चल सके और उपचार हो सके। -डॉ. टीएन आहूजा, नेत्र विशेषज्ञ, निरामया चैरिबल ट्रस्ट

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