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Gurugram News: शहर को चमकाने में भूमिका निभा रही नारी शक्ति
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करीब 2 हजार महिलाएं संभाल रहीं हैं शहर की सफाई का जिम्मा, आत्मनिर्भर भी बन रहीं
रेनू कुमारी
न्यू गुरुग्राम। शहर में कई ऐसी महिलाएं हैं जो घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ शहर की सफाई का जिम्मा भी संभाल रही हैं। ये महिलाएं सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों को साफ कर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में भूमिका निभा रही हैं।
सुबह-शाम घर का काम करने के बाद ये महिलाएं सड़कों पर झाड़ू लगाकर न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश कर रही हैं। नगर निगम की ओर से शहर में 2 हजार में महिलाएं सफाई कार्य में लगी हुई हैं। महिलाओं का कहना है कि शुरुआत में काम के दौरान हाथों में दर्द होता था लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत हो गई। गर्मियों में तेज धूप और सर्दियों में कड़ाके की ठंड के बीच भी वे अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं।
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घर से लेकर सड़क संभाल रहे जिम्मेदारी
सेक्टर-5 में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हूं। सुबह पांच बजे उठकर पहले घर का काम करती हूं, फिर सुबह सात बजे से सड़कों की सफाई में लग जाती हूं। मेरे तीन बच्चे हैं, उनकी जिम्मेदारी भी निभाती हूं। -पूनम
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इस काम को करने में शुरू-शुरू डर और जोखिम भरा लगा लेकिन अब काम करने में अच्छा लगता है कि घर की सफाई के साथ शहर के सफाई में भी योगदान दे रही हूं। -अंजना
कई बार झाड़ू लगाते समय आंख में धूल-मिट्टी उड़ती है। उसकी वजह से परेशानी होती है लेकिन परिवार के जिम्मेदारी के लिए यह काम करना पड़ रहा है। -नीलम
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रेनू कुमारी
न्यू गुरुग्राम। शहर में कई ऐसी महिलाएं हैं जो घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ शहर की सफाई का जिम्मा भी संभाल रही हैं। ये महिलाएं सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों को साफ कर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में भूमिका निभा रही हैं।
सुबह-शाम घर का काम करने के बाद ये महिलाएं सड़कों पर झाड़ू लगाकर न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश कर रही हैं। नगर निगम की ओर से शहर में 2 हजार में महिलाएं सफाई कार्य में लगी हुई हैं। महिलाओं का कहना है कि शुरुआत में काम के दौरान हाथों में दर्द होता था लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत हो गई। गर्मियों में तेज धूप और सर्दियों में कड़ाके की ठंड के बीच भी वे अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं।
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घर से लेकर सड़क संभाल रहे जिम्मेदारी
सेक्टर-5 में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हूं। सुबह पांच बजे उठकर पहले घर का काम करती हूं, फिर सुबह सात बजे से सड़कों की सफाई में लग जाती हूं। मेरे तीन बच्चे हैं, उनकी जिम्मेदारी भी निभाती हूं। -पूनम
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इस काम को करने में शुरू-शुरू डर और जोखिम भरा लगा लेकिन अब काम करने में अच्छा लगता है कि घर की सफाई के साथ शहर के सफाई में भी योगदान दे रही हूं। -अंजना
कई बार झाड़ू लगाते समय आंख में धूल-मिट्टी उड़ती है। उसकी वजह से परेशानी होती है लेकिन परिवार के जिम्मेदारी के लिए यह काम करना पड़ रहा है। -नीलम