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प्रसव के बाद वापस घर जाने के लिए महिला ने घंटों तक किया इंतजार
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गुरुग्राम। सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर बेहद लापरवाह हो गए हैं। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को भी उस समय लापरवाही देखने को मिली जब प्रसव के बाद एक महिला को वापस अपने घर जाने के लिए आपातकालीन विभाग के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ा। महिला के पति ने एंबुलेंस के लिए कई जगह बात की लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। मामला जब अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. दीपा जाखड़ के संज्ञान में पहुंचा तो उन्होंने विभागीय कर्मचारियों को तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध कराने को कहा। तब जाकर प्रसूता को घर जाने के लिए एंबुलेंस मिल सकी।
बिहार के मूल निवासी आशीष ने बताया कि वह मानेसर के बांसगांव में रहकर मजदूरी करता है। पत्नी को प्रसव के लिए दो दिन पहले ही सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल लाए थे। बुधवार दोपहर 2 बजे प्रसव होने के बाद बृहस्पतिवार को पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। उस समय आशीष को कहा गया था कि आपातकालीन विभाग के बाहर घर जाने के लिए एंबुलेंस मिल जाएगी। जब एंबुलेंस कर्मी से संपर्क किया तो उसने 108 पर कॉल करने को कहा। 108 पर कॉल करने पर एक नया नंबर मिला और उस पर संपर्क करने की बात कही गई। उस पर आशीष ने कॉल किया तो कर्मचारी ने खुद के छुट्टी पर होने की बात कही। बाद में मामले की शिकायत अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा जाखड़ से की गई, तब जाकर दंपती को एंबुलेंस मिल सकी। मौके पर मौजूद कई अन्य लोगों ने भी बताया कि प्रसव के बाद महिलाओं को वापस ले जाने के लिए परिजनों को इसी तरह से मशक्कत करनी पड़ती है।
कोट
अस्पताल के कई कर्मचारी विभागीय कार्य से अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी कर रहे हैं। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि किसी भी मरीज को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। महिला को एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए तत्काल विभागीय कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है। मरीजों का समुचित इलाज व सहूलियत दिलाना हमारी पहली प्राथमिकता है।
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- डॉ. दीपा जाखड़, प्रधा न चिकित्सा अधिकारी, सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल गुरुग्राम
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बिहार के मूल निवासी आशीष ने बताया कि वह मानेसर के बांसगांव में रहकर मजदूरी करता है। पत्नी को प्रसव के लिए दो दिन पहले ही सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल लाए थे। बुधवार दोपहर 2 बजे प्रसव होने के बाद बृहस्पतिवार को पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। उस समय आशीष को कहा गया था कि आपातकालीन विभाग के बाहर घर जाने के लिए एंबुलेंस मिल जाएगी। जब एंबुलेंस कर्मी से संपर्क किया तो उसने 108 पर कॉल करने को कहा। 108 पर कॉल करने पर एक नया नंबर मिला और उस पर संपर्क करने की बात कही गई। उस पर आशीष ने कॉल किया तो कर्मचारी ने खुद के छुट्टी पर होने की बात कही। बाद में मामले की शिकायत अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा जाखड़ से की गई, तब जाकर दंपती को एंबुलेंस मिल सकी। मौके पर मौजूद कई अन्य लोगों ने भी बताया कि प्रसव के बाद महिलाओं को वापस ले जाने के लिए परिजनों को इसी तरह से मशक्कत करनी पड़ती है।
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कोट
अस्पताल के कई कर्मचारी विभागीय कार्य से अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी कर रहे हैं। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि किसी भी मरीज को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। महिला को एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए तत्काल विभागीय कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है। मरीजों का समुचित इलाज व सहूलियत दिलाना हमारी पहली प्राथमिकता है।
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- डॉ. दीपा जाखड़, प्रधा न चिकित्सा अधिकारी, सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल गुरुग्राम