{"_id":"643307f8b7086a45670091e4","slug":"why-death-does-not-come-overnight-the-drama-tickled-gurgaon-news-c-1-1-417575-2023-04-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: मौत क्यों रात भर नहीं आती नाटक ने गुदगुदाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: मौत क्यों रात भर नहीं आती नाटक ने गुदगुदाया
विज्ञापन
रंग महोत्सव के तहत पालम विहार के एमफी थिएटर में हुआ नाटक का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पालम विहार के एमफी थिएटर में चल रहे रंग महोत्सव रंगलाटू के दौरान प्रताप सहगल द्वारा लिखित नाटक मौत क्यों रात भर नहीं आती का सफल मंचन हुआ। नाटक का निर्देशन शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी, फिल्म एवं टीवी कलाकार मोहन कांत ने किया तथा इस में अभिनय मुख्य भूमिका में शहर के ही वरिष्ठ रंगकर्मी एवं टीवी, फिल्म कलाकार हर्ष कुमार, तनुश्री और स्वयं मोहन कांत ने किया। अन्य भूमिकाओं में सूरज कुशवाह और हर्षित गुप्ता रहे। नाटक के नाम से ऐसा लगा कि किसी गंभीर विषय पर मंचन होगा परंतु अपने नाम के विपरीत इस नाटक ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। इसकी कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के व्यक्ति की है जो कर्ज के बोझ तथा अपने परिवार की जरूरतों को पूरा न कर पाने की वजह से आत्महत्या करने का निर्णय लेता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की कोशिश करता है, लेकिन हर तरीके में विफल रहता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की प्रक्रिया से हास्य रस उत्पन्न होता है और दर्शक उसका आनंद लेते हैं। विडंबना यह है कि जिन पैसों की वजह से वह आत्महत्या करना चाहता है पर मर नहीं पाता , उन्हीं पैसे के कारण उसे हृदयाघात होता है और उसकी मौत हो जाती है। उसे 80 लाख का धन मिलता है तो उस खुशी से उसका हृदयाघात हो जाता है। दर्शकों ने नाटक का भरपूर आनंद लिया। इस दौरान शहर के बहुत से रंगकर्मी अनिल संदूजा, नवीन कपूर सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पालम विहार के एमफी थिएटर में चल रहे रंग महोत्सव रंगलाटू के दौरान प्रताप सहगल द्वारा लिखित नाटक मौत क्यों रात भर नहीं आती का सफल मंचन हुआ। नाटक का निर्देशन शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी, फिल्म एवं टीवी कलाकार मोहन कांत ने किया तथा इस में अभिनय मुख्य भूमिका में शहर के ही वरिष्ठ रंगकर्मी एवं टीवी, फिल्म कलाकार हर्ष कुमार, तनुश्री और स्वयं मोहन कांत ने किया। अन्य भूमिकाओं में सूरज कुशवाह और हर्षित गुप्ता रहे। नाटक के नाम से ऐसा लगा कि किसी गंभीर विषय पर मंचन होगा परंतु अपने नाम के विपरीत इस नाटक ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। इसकी कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के व्यक्ति की है जो कर्ज के बोझ तथा अपने परिवार की जरूरतों को पूरा न कर पाने की वजह से आत्महत्या करने का निर्णय लेता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की कोशिश करता है, लेकिन हर तरीके में विफल रहता है। आत्महत्या के विभिन्न तरीकों को अपनाने की प्रक्रिया से हास्य रस उत्पन्न होता है और दर्शक उसका आनंद लेते हैं। विडंबना यह है कि जिन पैसों की वजह से वह आत्महत्या करना चाहता है पर मर नहीं पाता , उन्हीं पैसे के कारण उसे हृदयाघात होता है और उसकी मौत हो जाती है। उसे 80 लाख का धन मिलता है तो उस खुशी से उसका हृदयाघात हो जाता है। दर्शकों ने नाटक का भरपूर आनंद लिया। इस दौरान शहर के बहुत से रंगकर्मी अनिल संदूजा, नवीन कपूर सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।