{"_id":"6684835cbc1d8eaa8f02b954","slug":"villagers-scared-of-leopard-hope-for-help-from-wildlife-department-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-34061-2024-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: तेंदुए के खौफ से डरे ग्रामीण, वन्य जीव विभाग से सहायता की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: तेंदुए के खौफ से डरे ग्रामीण, वन्य जीव विभाग से सहायता की उम्मीद
विज्ञापन
टीकली और घामडौज में तेंदुआ देखे जाने से सहमे हुए हैं लोग
पूनम
गुरुग्राम। टीकली गांव में गाेवंश पर तेंदुए के हमले की घटना अभी ताजा ही थी कि घामडौज गांव में भी तेंदुए को देखे जाने से लोग खौफ में हैं। टीकली के बाद घामडौज में भी तेंदुए को देखा गया है। इन दोनों गांवों लोग डरे हुए हैं दूसरी और वन विभाग अपनी विवशता बताकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, लोग इस बात से भी परेशान हैं।
पिछले दिनों अरावली की तलहटी में बसे गांव टीकली में तेंदुए ने गोशाला में करीब 10 गोवंश को शिकार बना लिया था। अब गांव से करीब ढाई किमी दूर अरावली के दूसरी ओर घामडौज गांव में भी तेंदुए देखे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने वन्य जीव और वन विभाग से इससे बचाव की अपील की है। जिला परिषद के सदस्य और टीकली गांव के निवासी श्री भगवान ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने लगातार तेंदुए गांव में आ रहे हैं। गांव के युवाओं ने एक टीम बनाकर गोशाला के चारों और जाल डालकर गायों को तेंदुए से बचाने की कवायद शुरू की है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन्य जीव विभाग ने रस्मी तौर पर एक पिंजड़ा लगा दिया है, इसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। गांव के लोगों ने गोशाला की दीवार ऊंची करने के लिए तीन चार लाख रुपये एकत्र किए हैं। अब प्रशासन से मदद की गुहार है ताकि गोशाला की दीवार ऊंची कराई जा सके। गोशाला में करीब 150 गायें हैं और इनकी सुरक्षा जरूरी है। वन्य जीव विभाग के अधिकारी राजेश चहल का कहना है कि जो इलाके अरावली के जंगल के क्षेत्र में आते हैं, वहां वन्य जीवों से संबंधित नियमों के तहत जीवों को पकड़ा नहीं जा सकता है।
वन क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ा, वन रक्षक घटे
वन विभाग के पूर्व रेंज अधिकारी और वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कमल सिंह यादव बताते हैं कि गुरुग्राम जैसे इलाके में वन क्षेत्र पर अतिक्रमण के मामले बढ़े हैं मगर पिछले कई सालों से हरियाणा में वन रक्षकों की नियुक्ति ही नहीं हुई है। वर्ष 1986 में 1800 वन रक्षक थे। वर्ष 1996 में 1627 वन रक्षक थे। 2006 में यह संख्या 1400 रह गई, वर्ष 2016 में यह संख्या 900 रह गई। अभी पूरे हरियाणा में वन विभाग के पास महज 450 वन रक्षक हैं। ऐसे में न तो सरकार वन क्षेत्र पर अतिक्रमण रोक सकती है और न ही वन्य जीवों के गांवों में घुसने की घटना पर ही नियंत्रण रख सकती है। तेंदुआ देखे जाने को लेकर जांच के लिए गए वन विभाग के इंस्पेक्टर भी यह मानते हैं कि वन्य जीव विभाग के पास दो जिलों के लिए मात्र तीन वन रक्षक कर्मी हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञ ने कहा
पिछले दिनों वाइल्ड लाइफ की टीम ने नरसिंहपुर गांव में एक बिल्डिंग से एक युवा नर तेंदुए का सफल रेस्क्यू किया था। फरीदाबाद के बड़खल में आबादी के बीच तेंदुए का रेस्क्यू किया था। तेंदुए के आबादी के बीच आने की वजह, जंगल में उनके भोजन पानी की कमी है। अरावली में अतिक्रमण बढ़ रहा है। वहां पानी की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। जंगल में अवैध रूप से जंगली जीवों के शिकार भी होते रहे हैं। इस पर भी नियंत्रण की जरूरत है - अनिल गंडास, वन्य जीव रेस्क्यूअर, समाजसेवी
अधिकारी ने कहा
तेंदुआ अगर जंगल के क्षेत्र में किसी जीव पर हमला कर रहा है तो उसको लेकर सावधानी ही बरती जा सकती है। उसे पकड़ा नहीं जा सकता। यदि वह गांव के भीतर आता है तो वन विभाग के पास रेस्क्यू की पूरी तैयारी है। अरावली में पहले से तेंदुए हैं। अभी उनकी संख्या बढ़कर करीब 45 से 50 हो गई है। जंगल उनका प्राकृतिक आवास है, तो उन्हें वहां से हटाया नहीं जा सकता है।- अनंत प्रकाश पांडेय,अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग
टीकली और घामडौज दोनों गांव मेरे वार्ड में आते हैं। यहां के लोग डरे हुए हैं। 10 गोवंश को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया है। रात के वक्त यह गांव में आ रहा है। पहले भी तेंदुए आते रहे हैं मगर कम आते थे। पिछले डेढ़ महीने से ये ज्यादा आ रहे हैं। - श्री भगवान, पार्षद, जिला परिषद
युवाओं ने तेंदुए से गायों और जानवरों को बचाने के लिए टीम बनाई तो है मगर प्रशासन की मदद बहुत जरूरी है। वन्य जीव विभाग का सहयोग नहीं मिल रहा है। वे हाथ खड़े कर रहे हैं कि जंगल है तो वन्य जीव आएंगे ही। हमारी रातों की नींद गायब हो गई है। - कांति, ग्रामीण
विज्ञापन
पूनम
गुरुग्राम। टीकली गांव में गाेवंश पर तेंदुए के हमले की घटना अभी ताजा ही थी कि घामडौज गांव में भी तेंदुए को देखे जाने से लोग खौफ में हैं। टीकली के बाद घामडौज में भी तेंदुए को देखा गया है। इन दोनों गांवों लोग डरे हुए हैं दूसरी और वन विभाग अपनी विवशता बताकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, लोग इस बात से भी परेशान हैं।
पिछले दिनों अरावली की तलहटी में बसे गांव टीकली में तेंदुए ने गोशाला में करीब 10 गोवंश को शिकार बना लिया था। अब गांव से करीब ढाई किमी दूर अरावली के दूसरी ओर घामडौज गांव में भी तेंदुए देखे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने वन्य जीव और वन विभाग से इससे बचाव की अपील की है। जिला परिषद के सदस्य और टीकली गांव के निवासी श्री भगवान ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने लगातार तेंदुए गांव में आ रहे हैं। गांव के युवाओं ने एक टीम बनाकर गोशाला के चारों और जाल डालकर गायों को तेंदुए से बचाने की कवायद शुरू की है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन्य जीव विभाग ने रस्मी तौर पर एक पिंजड़ा लगा दिया है, इसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। गांव के लोगों ने गोशाला की दीवार ऊंची करने के लिए तीन चार लाख रुपये एकत्र किए हैं। अब प्रशासन से मदद की गुहार है ताकि गोशाला की दीवार ऊंची कराई जा सके। गोशाला में करीब 150 गायें हैं और इनकी सुरक्षा जरूरी है। वन्य जीव विभाग के अधिकारी राजेश चहल का कहना है कि जो इलाके अरावली के जंगल के क्षेत्र में आते हैं, वहां वन्य जीवों से संबंधित नियमों के तहत जीवों को पकड़ा नहीं जा सकता है।
विज्ञापन
वन क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ा, वन रक्षक घटे
वन विभाग के पूर्व रेंज अधिकारी और वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कमल सिंह यादव बताते हैं कि गुरुग्राम जैसे इलाके में वन क्षेत्र पर अतिक्रमण के मामले बढ़े हैं मगर पिछले कई सालों से हरियाणा में वन रक्षकों की नियुक्ति ही नहीं हुई है। वर्ष 1986 में 1800 वन रक्षक थे। वर्ष 1996 में 1627 वन रक्षक थे। 2006 में यह संख्या 1400 रह गई, वर्ष 2016 में यह संख्या 900 रह गई। अभी पूरे हरियाणा में वन विभाग के पास महज 450 वन रक्षक हैं। ऐसे में न तो सरकार वन क्षेत्र पर अतिक्रमण रोक सकती है और न ही वन्य जीवों के गांवों में घुसने की घटना पर ही नियंत्रण रख सकती है। तेंदुआ देखे जाने को लेकर जांच के लिए गए वन विभाग के इंस्पेक्टर भी यह मानते हैं कि वन्य जीव विभाग के पास दो जिलों के लिए मात्र तीन वन रक्षक कर्मी हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञ ने कहा
पिछले दिनों वाइल्ड लाइफ की टीम ने नरसिंहपुर गांव में एक बिल्डिंग से एक युवा नर तेंदुए का सफल रेस्क्यू किया था। फरीदाबाद के बड़खल में आबादी के बीच तेंदुए का रेस्क्यू किया था। तेंदुए के आबादी के बीच आने की वजह, जंगल में उनके भोजन पानी की कमी है। अरावली में अतिक्रमण बढ़ रहा है। वहां पानी की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। जंगल में अवैध रूप से जंगली जीवों के शिकार भी होते रहे हैं। इस पर भी नियंत्रण की जरूरत है - अनिल गंडास, वन्य जीव रेस्क्यूअर, समाजसेवी
अधिकारी ने कहा
तेंदुआ अगर जंगल के क्षेत्र में किसी जीव पर हमला कर रहा है तो उसको लेकर सावधानी ही बरती जा सकती है। उसे पकड़ा नहीं जा सकता। यदि वह गांव के भीतर आता है तो वन विभाग के पास रेस्क्यू की पूरी तैयारी है। अरावली में पहले से तेंदुए हैं। अभी उनकी संख्या बढ़कर करीब 45 से 50 हो गई है। जंगल उनका प्राकृतिक आवास है, तो उन्हें वहां से हटाया नहीं जा सकता है।- अनंत प्रकाश पांडेय,अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग
टीकली और घामडौज दोनों गांव मेरे वार्ड में आते हैं। यहां के लोग डरे हुए हैं। 10 गोवंश को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया है। रात के वक्त यह गांव में आ रहा है। पहले भी तेंदुए आते रहे हैं मगर कम आते थे। पिछले डेढ़ महीने से ये ज्यादा आ रहे हैं। - श्री भगवान, पार्षद, जिला परिषद
युवाओं ने तेंदुए से गायों और जानवरों को बचाने के लिए टीम बनाई तो है मगर प्रशासन की मदद बहुत जरूरी है। वन्य जीव विभाग का सहयोग नहीं मिल रहा है। वे हाथ खड़े कर रहे हैं कि जंगल है तो वन्य जीव आएंगे ही। हमारी रातों की नींद गायब हो गई है। - कांति, ग्रामीण