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Gurugram News: गांवों की महिलाओं ने अपने हुनर के दम पर बनाई पहचान
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महिलाएं बोलीं, खुद पर भरोसे, उद्यम की प्रवृति और सरकार की सहायता के प्रयोग से आया परिवर्तन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुरुग्राम के आस-पास के गांवों की महिलाएं अपने हुनर के दम पर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मेलों में अपनी पहचान बना रही हैं। कई ऐसे स्वयं सहायता समूह हैं जिन्होंने घरेलू उद्योग के अपने ब्रांड बना लिए हैं। पिछले दिनों आयोजित गीता महोत्सव में ऐसी महिला उद्यमियों की सराहना हुई। चंदू गांव के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी पूजा शर्मा इस बार अन्य महिलाओं के प्रोत्साहन के लिए प्रदर्शनी में मौजूद थीं। पूजा को उद्यमिता के लिए राष्ट्रपति से पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने मोटे अनाज के कई आधुनिक प्रयोग के साथ अपने समूह का एक ब्रांड क्षितिज बनाया है। ज्वार, बाजरा, रागी, चना, अलसी, अजवाइन, नारियल, ओट्स जैसी चीजों की कुकीज, बिस्किट, हेल्दी पफ की दर्जनों किस्म लोकप्रियता हासिल कर रही हैं।
चंदू गांव की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आशा और गीता बताती हैं कि मिलेट मॉम के नाम से उनकी तैयार की गई चीजों को लोगों ने पसंद किया है। झाड़सा गांव के विश्वास समूह की प्रमुख कांता बताती हैं कि चार साल पहले 10 महिलाओं के साथ उन्होंने अचार, चटनी, मुरब्बा, पापड़, जैम आदि बनाना शुरू किया। फिर सरकार से दो लाख रुपये लोन लिए। महिलाओं का दायरा बढ़ा अब वे कई किस्म के अचार, जैम आदि तैयार कर रही हैं। देश भर के मेलों में उन्हें निशुल्क जगह मिलती है, मेलों से आने के बाद भी लोग उनके प्रोडक्ट की मांग करते हैं। यह परिवर्तन खुद पर भरोसे और उद्यम की प्रवृति और सरकार की सहायता के प्रयोग से आया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुरुग्राम के आस-पास के गांवों की महिलाएं अपने हुनर के दम पर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मेलों में अपनी पहचान बना रही हैं। कई ऐसे स्वयं सहायता समूह हैं जिन्होंने घरेलू उद्योग के अपने ब्रांड बना लिए हैं। पिछले दिनों आयोजित गीता महोत्सव में ऐसी महिला उद्यमियों की सराहना हुई। चंदू गांव के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी पूजा शर्मा इस बार अन्य महिलाओं के प्रोत्साहन के लिए प्रदर्शनी में मौजूद थीं। पूजा को उद्यमिता के लिए राष्ट्रपति से पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने मोटे अनाज के कई आधुनिक प्रयोग के साथ अपने समूह का एक ब्रांड क्षितिज बनाया है। ज्वार, बाजरा, रागी, चना, अलसी, अजवाइन, नारियल, ओट्स जैसी चीजों की कुकीज, बिस्किट, हेल्दी पफ की दर्जनों किस्म लोकप्रियता हासिल कर रही हैं।
चंदू गांव की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आशा और गीता बताती हैं कि मिलेट मॉम के नाम से उनकी तैयार की गई चीजों को लोगों ने पसंद किया है। झाड़सा गांव के विश्वास समूह की प्रमुख कांता बताती हैं कि चार साल पहले 10 महिलाओं के साथ उन्होंने अचार, चटनी, मुरब्बा, पापड़, जैम आदि बनाना शुरू किया। फिर सरकार से दो लाख रुपये लोन लिए। महिलाओं का दायरा बढ़ा अब वे कई किस्म के अचार, जैम आदि तैयार कर रही हैं। देश भर के मेलों में उन्हें निशुल्क जगह मिलती है, मेलों से आने के बाद भी लोग उनके प्रोडक्ट की मांग करते हैं। यह परिवर्तन खुद पर भरोसे और उद्यम की प्रवृति और सरकार की सहायता के प्रयोग से आया है।
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