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Gurugram News: युगांडा कुरिअर किया सामान मिला था टूटा, बीमा कंपनी 4.11 ब्याज के साथ देगी
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उपभोक्ता आयोग से -मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 22 हजार रुपये भी देगी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने लिबर्टी बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता कंपनी की रोकी गई 4.11 लाख रुपये की क्लेम राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 22 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है
सेक्टर-14 स्थित स्मार्ट रूफ सोलर सॉल्यूशन ने 29 अगस्त 2018 को युगांडा देश के लिए जहाज के जरिये अपना सामान भेजा था। इस सामान का बीमा लिबर्टी इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। लगभग एक महीने बाद जब सामान युगांडा पहुंचा, तो जांच के दौरान पाया गया कि सामान टूट चुका था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कंपनी को दोबारा सामान हवाई जहाज से भेजना पड़ा, जिससे उन्हें करीब 10.87 लाख रुपये का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हुआ।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बीमा कंपनी ने शुरुआत में 4.11 लाख रुपये के क्लेम पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में भुगतान नहीं किया। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने बीमा कंपनी की सेवा में लापरवाही मानते हुए आदेश दिया कि स्वीकृत क्लेम राशि को ब्याज सहित तुरंत शिकायतकर्ता के खाते में जमा किया जाए। आयोग के इस फैसले से उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो बीमा दावों के लिए कंपनियों के चक्कर काटते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने लिबर्टी बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता कंपनी की रोकी गई 4.11 लाख रुपये की क्लेम राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 22 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है
सेक्टर-14 स्थित स्मार्ट रूफ सोलर सॉल्यूशन ने 29 अगस्त 2018 को युगांडा देश के लिए जहाज के जरिये अपना सामान भेजा था। इस सामान का बीमा लिबर्टी इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। लगभग एक महीने बाद जब सामान युगांडा पहुंचा, तो जांच के दौरान पाया गया कि सामान टूट चुका था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कंपनी को दोबारा सामान हवाई जहाज से भेजना पड़ा, जिससे उन्हें करीब 10.87 लाख रुपये का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हुआ।
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शिकायतकर्ता के अनुसार, बीमा कंपनी ने शुरुआत में 4.11 लाख रुपये के क्लेम पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में भुगतान नहीं किया। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने बीमा कंपनी की सेवा में लापरवाही मानते हुए आदेश दिया कि स्वीकृत क्लेम राशि को ब्याज सहित तुरंत शिकायतकर्ता के खाते में जमा किया जाए। आयोग के इस फैसले से उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो बीमा दावों के लिए कंपनियों के चक्कर काटते हैं।
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