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Gurugram News: तुलसी राखी...भाई की कलाई पर सजेगा प्रकृति का वरदान
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राघव मोहता इको फ्रेंडली राखी वाली खबर
बाजारों की रौनक बढ़ रहीं लकड़ी के बीड्स, कच्चे धागों की मोली वाली राखी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पर्यावरण के साथ त्योहारों को जोड़ने के लिए पर्यावरण अनुकूल राखियां बनाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य प्रदूषण मुक्त शहर बनाना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। आनंदा वृंदा संगठन ने लकड़ी के बीड्स, कच्चे धागों की मोली से तुलसी की राखियां तैयार की हैं। इन राखियों में तुलसी के बीज पिरोए गए हैं। रक्षा बंधन के बाद इन्हें गमले में डालने पर तुलसी के पौधे उगेंगे। संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, राखी में चंदन की सुगंध का भी प्रयोग हुआ है। कुछ अन्य संगठनों ने भी प्राकृतिक चीजों और बीजों से राखियां बनाई हैं। इन राखियों को प्रयोग के बाद जमीन में डालकर फूल या सब्जियों के पौधे उगाए जा सकते हैं। ऑनलाइन खरीदारी में भी ऐसे पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध हैं।
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पर्यावरण संरक्षण का रखा जा रहा ध्यान
हमारी टीम में दिव्यांग महिलाएं हैं। राखी पर हमारी टीम ने काफी राखियां बनाई हैं। हमारी कोशिश है कि इसमें पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखा जाए। बच्चों के लिए खूबसूरत आकर्षक राखियां बनाई हैं, ताकि उनके जागरूकता भी बढ़े। -मधुमिता पुरी, अवाकायम
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हमारी टीम ने ऐसी राखियां तैयार की हैं जिसमें किसी किस्म से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली चीज नहीं है। प्लास्टिक बीड्स की जगह लकड़ी की बीड्स लगाकर 10,000 राखियों में करीब एक लाख प्लास्टिक बीड़्स लगाने से बचाया है। -राघव मोहता, आनंदा वृंदा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पर्यावरण के साथ त्योहारों को जोड़ने के लिए पर्यावरण अनुकूल राखियां बनाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य प्रदूषण मुक्त शहर बनाना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। आनंदा वृंदा संगठन ने लकड़ी के बीड्स, कच्चे धागों की मोली से तुलसी की राखियां तैयार की हैं। इन राखियों में तुलसी के बीज पिरोए गए हैं। रक्षा बंधन के बाद इन्हें गमले में डालने पर तुलसी के पौधे उगेंगे। संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, राखी में चंदन की सुगंध का भी प्रयोग हुआ है। कुछ अन्य संगठनों ने भी प्राकृतिक चीजों और बीजों से राखियां बनाई हैं। इन राखियों को प्रयोग के बाद जमीन में डालकर फूल या सब्जियों के पौधे उगाए जा सकते हैं। ऑनलाइन खरीदारी में भी ऐसे पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध हैं।
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पर्यावरण संरक्षण का रखा जा रहा ध्यान
हमारी टीम में दिव्यांग महिलाएं हैं। राखी पर हमारी टीम ने काफी राखियां बनाई हैं। हमारी कोशिश है कि इसमें पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखा जाए। बच्चों के लिए खूबसूरत आकर्षक राखियां बनाई हैं, ताकि उनके जागरूकता भी बढ़े। -मधुमिता पुरी, अवाकायम
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हमारी टीम ने ऐसी राखियां तैयार की हैं जिसमें किसी किस्म से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली चीज नहीं है। प्लास्टिक बीड्स की जगह लकड़ी की बीड्स लगाकर 10,000 राखियों में करीब एक लाख प्लास्टिक बीड़्स लगाने से बचाया है। -राघव मोहता, आनंदा वृंदा