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मां को देख फफक पड़ी बेटी: पांच साल तक लापता रही आदिवासी युवती, गुरुग्राम में बंधक बनाकर कराई जाती रही मजदूरी

Fri, 22 May 2026 08:40 PM IST
Rahul Kumar Tiwari संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 22 May 2026 08:40 PM IST
सार

झारखंड की 23 वर्षीय युवती को कथित तौर पर पांच वर्षों तक बंधक बनाकर घरेलू काम करवाने का मामला सामने आया है। एनएचआरसी की मदद से गुरुग्राम पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने सेक्टर-40 स्थित मकान से युवती को रेस्क्यू किया।

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Tribal girl from Jharkhand was missing for five years recovered by trafficking unit in Gurugram
झारखंड की युवती पांच साल तक बंधक - फोटो : अमर उजाला संवाद

विस्तार

झारखंड की एक 23 वर्षीय युवती को कथित तौर पर पिछले पांच वर्षों तक बंधक बनाकर घरेलू काम करवाने और वेतन न देने का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के मदद से गुरुग्राम पुलिस, प्रशासन और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने एक साथ कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को करीब साढ़े चार बजे युवती को सेक्टर-40 स्थित एक मकान से सुरक्षित रेस्क्यू किया।

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पीड़िता झारखंड के साहेबगंज जिले की रहने वाली है। बताया जा रहा है कि युवती पिछले करीब पांच वर्षों से लापता थी। परिजनों के अनुसार गांव की ही एक महिला एजेंट ने उसे दिल्ली में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। इसके बाद उसे झारखंड से दिल्ली लाया गया, जहां शुभांशु और सुनीता से वो मिली। इसके बाद उसे घरों और कोठियों में घरेलू काम पर लगाया जाता रहा।

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परिवार का आरोप है कि युवती से साफ-सफाई और घरेलू काम लगातार करवाए जाते रहे, लेकिन उसे कभी वेतन नहीं दिया गया। जब भी वह घर लौटने की बात करती उसकी लोकेशन बदल दी जाती थी। करीब हर छह महीने में उसे दूसरी जगह भेज दिया जाता था ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके। लगभग दो साल पहले उसे गुरुग्राम लाया गया था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब युवती ने किसी तरह अपने भाई से फोन के जरिए संपर्क किया। इसके बाद उसकी मां ने दिल्ली स्थित झारखंड भवन पहुंचकर बेटी को मुक्त कराने की गुहार लगाई। झारखंड भवन के नोडल अधिकारी राहुल सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए मिशन मुक्ति फाउंडेशन को पत्र भेजा। संस्था की ओर से एनएचआरसी में शिकायत दर्ज कराई गई।

शिकायत मिलने के बाद एनएचआरसी की सदस्य प्रियंक कानूनगो ने तुरंत संज्ञान लिया और गुरुग्राम के पुलिस उपायुक्त ईस्ट, जिला प्रशासन, श्रम विभाग और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए। इसके बाद गठित टीम ने सेक्टर-40 के मकान नंबर 787 में छापेमारी की। मौके पर केवल युवती और सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। टीम ने युवती को सुरक्षित बाहर निकालकर परिजनों को सौंप दिया।
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एनएचआरसी ने मामले को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए पीड़िता को बकाया वेतन दिलाने और पूरे नेटवर्क की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं युवती को परिजनों से मिलाने में मिशन मुक्ति फांउडेशन के निदेशक विरेंद्र, महिला एवं बाल विकास विभाग, झारखंड सरकार और झारखंड भवन, नई दिल्ली से राहुल, नायब तहसीलदार, श्रम निरीक्षक नरेश कुमार गठित टीम में शामिल रहे।

युवती को सेक्टर 40 से सुरक्षित बचाकर उसके परिजनों से मुलाकात करा दी गई है। मामले से संबधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए युवती और परिजनों से सेक्टर 40 थाने में जानकारी जुटाई जा रही है। -विरेंद्र, मिशन मुक्ति फांउडेशन, निदेशक

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