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Gurugram News: जलसंकट से मिलेगी राहत, नहर का होगा पुनरुद्धार

Thu, 28 Mar 2024 11:58 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Mar 2024 11:58 PM IST
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There will be relief from water crisis, the canal will be revived
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सिंचाई विभाग ने जारी किए टेंडर, अभी क्षमता से काफी कम आ रहा पानी



पूनम
गुरुग्राम। जल संकट से जूझ रहे शहर के लोगों को राहत मिलेगी। गुरुग्राम समेत आसपास के गांवों और बहादुरगढ़ तक की आबादी को यमुना का जल उपलब्ध कराने वाले गुड़गांव वाटर चैनल का पुनरुद्धार किया जा रहा है। इस नहर को वर्ष 2050 की आबादी को ध्यान में रखते हुए अपटूडेट किया जाना है। इसको लेकर सिंचाई विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं। जीएसटी समेत इसमें 1900 करोड़ रुपये खर्च होने हैं और इसके पुनर्निर्माण के लिए 30 महीने का वक्त तय किया गया है।
चैनल को नए सिरे से बनाए जाने तक इसके समानांतर बने दूसरे नहर एनसीआर वाटर चैनल से गुरुग्राम में जलापूर्ति हो सकेगी। एनसीआर वाटर चैनल करीब दस साल पहले बना था। इसकी क्षमता 800 क्यूसेक पानी की है। गुड़गांव वाटर चैनल वर्ष 1992- 94 में बना था, अब इसमें काफी शिल्ट जमा हो गई है। अपनी क्षमता से काफी कम पानी इससे आ रहा है। खुला होने के कारण इसमें जानवर और कचरा आदि गिरते हैं। इसके किनारे कई जगह टूट चुके हैं। पानी की चोरी की घटनाएं होती रहती हैं।
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गुरुग्राम, मेवात, बहादुरगढ़, एचएसआईआईडीसी क्षेत्र की बुझेगी प्यास
अभी गुड़गांव वाटर चैनल की क्षमता 175 क्यूसेक पानी की है। मगर शिल्ट जमा होने के कारण इसकी क्षमता लगभग आधी रह गई है। पुनर्निर्माण के बाद इसकी क्षमता बढ़ाकर 686 क्यूसेक की जाएगी। एक क्यूसेक का लगभग 2.45 मिलियन लीटर होता है। सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार इसमें करीब 500 क्यूसेक गुरुग्राम में खर्च होगा। अभी तक जो मांग आई है, उसके अनुसार इसमें आने वाले पानी में 200 क्यूसेक जीएमडीए, 100 क्यूसेक मेवात, 58 क्यूसेक बहादुरगढ़, 60 क्यूसेक हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के इलाके और 35 क्यूसेक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के इलाके में जाएगा। जीएमडीए के एसई अभिनव वर्मा के अनुसार, जब तक गुड़गांव वाटर चैनल में निर्माण कार्य चलेगा, एनसीआर वाटर चैनल से पानी आएगा और बसई और चंदू के प्लांट को पाइप लाइन से जोड़कर कच्चा पानी दोनों प्लांट में साझा होंगे। फिलहाल गुड़गांव वाटर चैनल बसई के ट्रीटमेंट प्लांट और एनसीआर वाटर चैनल चंदू बुढ़ेरा के प्लांट से जुड़े हैं।
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खुले में नहीं आएगा पानी, स्काडा से होगी मॉनिटरिंग
सोनीपत के काकरोई वाटर वर्क्स से यह नहर करीब 70 किमी की दूरी तय कर गुरुग्राम पहुंचती है। नहर का रास्ता पुराना ही रहेगा। मगर 27 किमी तक नहर को ढक दिया जाएगा। अभी तक यह नहर पूरी तरह खुला हुआ है। शेष 43 किमी करीब तीन मीटर व्यास की ग्रेविटी पाइप से पानी गुरुग्राम के बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचेगा। पूरी नहर को स्काडा मॉनिटरिंग सिस्टम से निगरानी के दायरे में रखा जाएगा। गड़बड़ियों का पता स्काडा सेंटर में कंप्यूटर स्क्रीन पर चल जाएगा। दूसरी ओर समय-समय पर नहर और पाइप लाइन में जमने वाली शिल्ट की सफाई की व्यवस्था इसमें होगी।



रेणुका डैम से भी मिलेगा फायदा

हालांकि इस नहर को 2050 में गुरुग्राम में पानी की मांग के मद्देनजर तैयार किया जा रहा है मगर जैसे-जैसे पानी की जरूरत बढ़ेगी इससे ज्यादा पानी लिया जा सकेगा। यमुना के पानी की जरूरत और बहाव पर नियंत्रण के लिए पांच राज्यों के समझौते से बन रहे रेणुका डैम से पानी उचित मात्रा में लिया जा सकेगा। आने वाले दिनों में पानी की जरूरत के लिए इस डैम से भी गुड़गांव वाटर चैनल में पानी आ सकेगा।
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