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Gurugram News: मेवात में हमेशा रहा है हिन्दू-मुसलमान के बीच भाई चारा
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अमर उजाला ब्यूरो
नूंह। जलाभिषेक के दौरान नूंह में हुई हिंसा से मेवात में हिन्दू-मुस्लिम एकता को आघात लगा है। इस क्षेत्र में दशकों से दोनों समुदायों के बीच हिंसा नहीं हुई है। स्थानीय लोग इसे एक साजिश के रूप में देखते हैं। उनका कहना हैं कि यह क्षेत्र हमेशा से शांति प्रिय रहा है।
नूंह यानी मेवात को वो इलाका जहां मेव मुसलमान रहते हैं और कई इतिहासकारों की इसमें दिलचस्पी रही है। नूंह से भड़की हिंसा ने इस इलाके में सामाजिक खाई अब चौड़ी कर दी है। लंबे अरसे बाद अचानक मेवात में नफरत किसने भरी, ये कहना मुश्किल है। हां, इसमें दो राय नहीं कि शुरुआत बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर पत्थरबाजी से हुई। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई नफरती बातों ने इसमें घी डाला।
इतिहासकार सद्दीक अहमद मेव ने कहा कि नूंह हिंसा युवाओं व तीर्थ यात्रियों के बीच का विवाद था, जिसमें ऐसा हुआ। ऐसे में इसका असर लंबे समय तक नहीं रहेगा। नूंह हिंसा दूर से भले ही दो समुदायों के बीच का विवाद लगता हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों समुदाय के लोग जब साथ बैठेंगे तो शिकायतें दूर हो जाएंगी। सद्दीक ने कहा कि नूंह में कावड़ यात्रा और 84 कोस की बृज मंडल की यात्रा कई सालों से निकलती रही है। कई गांवों में लोग कांवड़ियों व बृजधाम के लोगों के लिए काफी इंतजाम करते हैं। ऐसे में दो समुदायों के बीच कोई दुश्मनी नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि साल 2021 से नल्हड में यह यात्रा शुरू हुई हैं। ऐसे में इसमें भी पूजा-पाठ में कोई एतराज नहीं है, लेकिन कुछ लोगों की बात से यह मामला बिगड़ा। सद्दीक कहते हैं कि मेवात के मुसलमानों के नाम और अन्य प्रथाएं हिंदुओं से काफी मिलती हैं। केवल निकाह और खतना छोड़ दीजिए तो। पहले लोग बच्चों के नाम भी हिन्दुओं के नाम पर ही रखते थे।
पूर्व प्रोफेसर आरएन यादव कहते हैं कि मेवात के बारे में एक राय नहीं बनाई जा सकती है। इसका लंबा इतिहास रहा है। नूंह हिंसा की खाई को सभी को मिलकर भरने की जरूरत है। यह क्षेत्र हमेशा से शांति प्रिय रहा है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी यहां दो समुदाय के बीच टकराव नहीं हुआ है। ऐसे आयोजनों को लेकर दोनों पक्षों को ध्यान देने की जरूरत है।
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नूंह। जलाभिषेक के दौरान नूंह में हुई हिंसा से मेवात में हिन्दू-मुस्लिम एकता को आघात लगा है। इस क्षेत्र में दशकों से दोनों समुदायों के बीच हिंसा नहीं हुई है। स्थानीय लोग इसे एक साजिश के रूप में देखते हैं। उनका कहना हैं कि यह क्षेत्र हमेशा से शांति प्रिय रहा है।
नूंह यानी मेवात को वो इलाका जहां मेव मुसलमान रहते हैं और कई इतिहासकारों की इसमें दिलचस्पी रही है। नूंह से भड़की हिंसा ने इस इलाके में सामाजिक खाई अब चौड़ी कर दी है। लंबे अरसे बाद अचानक मेवात में नफरत किसने भरी, ये कहना मुश्किल है। हां, इसमें दो राय नहीं कि शुरुआत बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर पत्थरबाजी से हुई। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई नफरती बातों ने इसमें घी डाला।
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इतिहासकार सद्दीक अहमद मेव ने कहा कि नूंह हिंसा युवाओं व तीर्थ यात्रियों के बीच का विवाद था, जिसमें ऐसा हुआ। ऐसे में इसका असर लंबे समय तक नहीं रहेगा। नूंह हिंसा दूर से भले ही दो समुदायों के बीच का विवाद लगता हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों समुदाय के लोग जब साथ बैठेंगे तो शिकायतें दूर हो जाएंगी। सद्दीक ने कहा कि नूंह में कावड़ यात्रा और 84 कोस की बृज मंडल की यात्रा कई सालों से निकलती रही है। कई गांवों में लोग कांवड़ियों व बृजधाम के लोगों के लिए काफी इंतजाम करते हैं। ऐसे में दो समुदायों के बीच कोई दुश्मनी नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि साल 2021 से नल्हड में यह यात्रा शुरू हुई हैं। ऐसे में इसमें भी पूजा-पाठ में कोई एतराज नहीं है, लेकिन कुछ लोगों की बात से यह मामला बिगड़ा। सद्दीक कहते हैं कि मेवात के मुसलमानों के नाम और अन्य प्रथाएं हिंदुओं से काफी मिलती हैं। केवल निकाह और खतना छोड़ दीजिए तो। पहले लोग बच्चों के नाम भी हिन्दुओं के नाम पर ही रखते थे।
पूर्व प्रोफेसर आरएन यादव कहते हैं कि मेवात के बारे में एक राय नहीं बनाई जा सकती है। इसका लंबा इतिहास रहा है। नूंह हिंसा की खाई को सभी को मिलकर भरने की जरूरत है। यह क्षेत्र हमेशा से शांति प्रिय रहा है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी यहां दो समुदाय के बीच टकराव नहीं हुआ है। ऐसे आयोजनों को लेकर दोनों पक्षों को ध्यान देने की जरूरत है।