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Gurugram News: भीषण गर्मी में सूखा बडेड गांव का तालाब
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बडेड गांव में सूखा पड़ा तालाब
-ग्रामीणों को पशुओं के पीने के लिए पानी की व्यवस्था करना हो रहा मुश्किल
सद्दाम हुसैन
पिनगवां । आसमान से बरस रही आग और धरती पर सूखे पड़े तालाब ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। भीषण गर्मी के बीच जहां इंसान पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं, वहीं बेजुबान पशु-पक्षियों की हालत और भी खराब होती जा रही है। गांव बडेड का मुख्य तालाब पूरी तरह सूखा हुआ है, जिससे ग्रामीणों को पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लगातार बढ़ते तापमान और पानी संरक्षण की अनदेखी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। गांव का प्रमुख तालाब, जो कभी पशुओं और पक्षियों के लिए जीवनदायिनी माना जाता था, आज सूखी जमीन में तब्दील हो चुका है। तालाब में पानी नहीं होने से गांव के पशु दूर-दूर तक पानी की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि पक्षियों को भी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर उड़ान भरनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से तालाब में पर्याप्त पानी जमा नहीं हुआ है। समय रहते जल संरक्षण के इंतजाम नहीं किए गए, जिसके कारण स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान भी तालाब की साफ-सफाई और पानी रोकने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बारिश का पानी बहकर निकल जाता है।
लियाकत, खालिद, साहून, इल्यास, आबिद, खुशिला, इदरीश और रमजान समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब पूरे गांव के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गर्मियों के दिनों में गांव के अधिकांश पशु इसी तालाब पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब पानी नहीं होने से लोगों को निजी स्तर पर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तालाब के आसपास कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, जिससे तालाब का क्षेत्र लगातार सिमटता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल बडेड गांव ही नहीं, बल्कि इलाके के कई गांवों के तालाब भी सूखे पड़े हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और बरसात से पहले इसकी सफाई व गहरीकरण कराया जाए।
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जिले के ज्यादातर तालाबों में पर्याप्त पानी भरा हुआ है। यदि किसी गांव में पानी की समस्या सामने आती है तो संबंधित विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर जल्द समाधान कराया जाएगा। ग्रामीणों की सुविधा और पशुओं के लिए पानी उपलब्ध कराने को प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर कार्य कर रहा है।
- कविता, खंड पंचायत अधिकारी पिनगवां
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सद्दाम हुसैन
पिनगवां । आसमान से बरस रही आग और धरती पर सूखे पड़े तालाब ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। भीषण गर्मी के बीच जहां इंसान पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे हैं, वहीं बेजुबान पशु-पक्षियों की हालत और भी खराब होती जा रही है। गांव बडेड का मुख्य तालाब पूरी तरह सूखा हुआ है, जिससे ग्रामीणों को पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लगातार बढ़ते तापमान और पानी संरक्षण की अनदेखी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। गांव का प्रमुख तालाब, जो कभी पशुओं और पक्षियों के लिए जीवनदायिनी माना जाता था, आज सूखी जमीन में तब्दील हो चुका है। तालाब में पानी नहीं होने से गांव के पशु दूर-दूर तक पानी की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि पक्षियों को भी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर उड़ान भरनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से तालाब में पर्याप्त पानी जमा नहीं हुआ है। समय रहते जल संरक्षण के इंतजाम नहीं किए गए, जिसके कारण स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान भी तालाब की साफ-सफाई और पानी रोकने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बारिश का पानी बहकर निकल जाता है।
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लियाकत, खालिद, साहून, इल्यास, आबिद, खुशिला, इदरीश और रमजान समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब पूरे गांव के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गर्मियों के दिनों में गांव के अधिकांश पशु इसी तालाब पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब पानी नहीं होने से लोगों को निजी स्तर पर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तालाब के आसपास कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, जिससे तालाब का क्षेत्र लगातार सिमटता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल बडेड गांव ही नहीं, बल्कि इलाके के कई गांवों के तालाब भी सूखे पड़े हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और बरसात से पहले इसकी सफाई व गहरीकरण कराया जाए।
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जिले के ज्यादातर तालाबों में पर्याप्त पानी भरा हुआ है। यदि किसी गांव में पानी की समस्या सामने आती है तो संबंधित विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर जल्द समाधान कराया जाएगा। ग्रामीणों की सुविधा और पशुओं के लिए पानी उपलब्ध कराने को प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर कार्य कर रहा है।
- कविता, खंड पंचायत अधिकारी पिनगवां