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Gurugram News: तेजाब प्रकरण में दोषी को अदालत ने नहीं माना नाबालिग

Tue, 11 Apr 2023 01:24 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 11 Apr 2023 01:24 AM IST
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The court did not consider the accused a minor in the acid case
दोषी के भाई की हाई कोर्ट याचिका पर जिला अदालत कर रही थी सुनवाई
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एक महिला पर तेजाब से हमला करने पर दो लोगों को दी थी आजीवन कारावास की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नौ साल पहले महिला पर तेजाब फेंकने के मामले में जिला अदालत ने दोषी को नाबालिग नहीं माना है। दोषी इस्माइल के भाई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि घटना के समय उसका भाई नाबालिग था। याचिका पर हाईकोर्ट ने जिला अदालत को सुनवाई करने के आदेश दिए थे। मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फलित शर्मा की अदालत ने आरोपी को घटना के समय नाबालिग न मानने का आदेश दिया। जिस भाई ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी,उससे दोषी की उम्र में सिर्फ तीन महीने का ही अंतर पाया गया।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अंजू रावत ने बताया कि सुनवाई के दौरान दोषी के भाई की तरफ से अदालत में जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट दिए गए थे। उन्होंने बताया कि स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट व जन्म प्रमाण पत्र के अदालत ने जांच के आदेश दिए थे। जांच में सामने आया कि दोषी इस्माइल का जन्म प्रमाण पत्र किसी भी अस्पताल की तरफ से जारी नहीं किया गया था। जन्म प्रमाण पत्र गांव के ही उप प्रधान के बयान पर बनाया गया था। उप प्रधान का कहना है कि दोषी के पिता की तरफ से जो जानकारी दी गई थी उसी के आधार पर बनवाया गया था। इसके साथ ही दोषी की तरफ से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट बिजनौर के मदरसे की तरफ से जारी किया गया था। जिस मदरसे का दोषी ने सर्टिफिकेट दिया है,उसी मदरसे में दोषी के सभी भाई-बहन ने दाखिला लिया था और एक साल बाद सबने एक साथ ही छोड़ दिया था। इस मामले में जिला अदालत ने दोषी की ओसिफिकेशन रिपोर्ट (व्यक्ति की हड्डियों की जांच रिपोर्ट) भी जांच कराई गई थी।
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दिसंबर 2014 में पालम विहार क्षेत्र में धर्म कॉलोनी में घरों में काम करने वाली महिला से शारीरिक संबंध बनाने को लेकर दबाव बनाते थे। महिला ने इसका विरोध किया तो दोषियों ने उस पर तेजाब फेंक दिया था। इस मामले में जिला अदालत ने इस्माइल व राजा को आजीवन कारावास की सजा दी थी। इसके बाद से इस मामले में दूसरे दोषी राज ने भी नाबालिग होने की बात कहकर अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत के आदेश पर दोषी राजा पर फर्जी दस्तावेज अदालत में देने पर मामला भी दर्ज किया गया था। सोमवार को अदालत ने दोषी को घटना के समय नाबालिग न मानने का फैसला दिया है।
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